बिजनेस लोन का कराएं इंश्योरेंस: जानें क्यों और कैसे

बिजनेस लोन इंश्योरेंस की बुनियादी जरूरत

अकसर कहा जाता है और सही गया है कि आपके पास हमेशा एक बैकअप प्लान होना चाहिए. संक्षिप्त में कहें तो यही काम बिजनेस लोन इंश्योरेंस करता है. यह एक प्रोटेक्शन कवर है, जो लोन लेने वाले शख्स के साथ कुछ अनहोनी होने पर देय लोन राशि को चुकाता है. मालिक की मौत के कारण कई कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों की आजीविका एक व्यवसाय पर निर्भर हो सकती है, भले ही बिजनेस छोटा हो. इसलिए, बिजनेस का चलना किसी एक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर नहीं हो सकता. एक शीर्ष अधिकारी, मुख्य अधिकारी या फिर किसी पार्टनर के सामने मुश्किल स्थितियां आ सकती हैं जैसे गंभीर बीमारी, दर्दनाक हादसा या फिर मौत.

ऐसी स्थितियों में अगर मुख्य सदस्य बिजनेस चलाने में अक्षम हो जाए तो कंपनी की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. यह खास तौर पर सीमित फंड्स वाले छोटे उद्यमों के लिए लागू हो सकता है. बिजनेस को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए दिवालियापन से बचे रहें. इसके लिए जरूरी है कि उपलब्ध फंड्स बिजनेस को चलाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाएं और अन्य किसी बकाया लोन को चुकाने के लिए अन्य स्रोतों का इस्तेमाल किया जाए. यह रीपेमेंट लोन इंश्योरेंस या फिर लोन प्रोटेक्शन के जरिए हो सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि बिजनेस वित्तीय रूप से जवाबदेह बना रहे और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी काम करना जारी रखे.

इतना ही नहीं, लोन प्रोवाइडर्स जैसे बैंक अकसर कहते हैं कि किसी एंटरप्राइज के मुख्य शख्स को इंश्योरेंस कवर की एप्लिकेशन डालनी चाहिए ताकि लोन चुकाया जा सके. लिहाजा, इस तरह का प्लान होने से बैंक को जरूरी आश्वासन मिलता है, कंपनी की साख बढ़ती है और बिजनेस लोन मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

बिजनेस लोन इंश्योरेंस की प्रक्रिया: बिजनेस लोन प्रोटेक्शन प्लान उस वक्त एक्टिवेट हो जाता है, जब संबंधित बिजनेस का मालिक बीमार हो, उसका एक्सीडेंट हो जाए या फिर मौत. इन कारणों के कारण वह शख्स बिजनेस में योगदान देने लायक नहीं रह जाएगा.

इंश्योरेंस के एक्टिवेट होने से कुछ फंड्स तुरंत जारी कर दिए जाएंगे, ताकि लोन राशि को एक निश्चित प्रक्रिया के तहत चुकाया जा सके. इसमें कर्जदाता के साथ बातचीत की जाती है, उसे स्थिति से अवगत कराया जाता है. साथ ही लोन के पुनर्भुगतान पर लंबी अवधि के समाधान पर भी चर्चा होती है. शुरुआत में जारी किया गया फंड असल में सिर्फ लोन चुकाने के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि इसका बिजनेस में उपयोग और अन्य क्रेडिट एक्टिविटीज के लिए भी होता है. यह फैसला बिजनेस चला रहे अन्य लोग भी कर सकते हैं. आप इंश्योरेंस या फिर लोन के लिए प्रोटेक्शन प्लान या तो उसी कर्जदाता से ले सकते हैं, जिसने आपका लोन मंजूर किया है या फिर किसी अन्य बैंक या इंश्योरेंस एजेंसी से भी. इसके अलावा, यह अकसर एक फ्लेक्सिबल योजना होती है और लोन अमाउंट में बदलाव के लिए प्रोटेक्शन कवर बदला जा सकता है, यानी अगर बड़ा लोन लिया जाता है तो कवर और भी बड़ा हो सकता है.

बिजनेस लोन इंश्योरेंस कैसे काम करता है

प्रोटेक्शन प्लान में क्लेम करने, उसे एक्टिवेट करने और अप्लाई करने के बारे में आपको अच्छे से पता होना चाहिए. यह सुनिश्चित करेगा कि सभी अहम जरूरतें समय पर क्लेम और बिना झंझट पूरी हो गईं.

– सबसे पहले, सावधानी इंश्योरेंस का चुनाव करना चाहिए.
– इसके बाद इंश्योरेंस एजेंसी या फिर बैंक आवेदक या संबंधित बिजनेस की एलिजिबिलिटी चेक करते हैं.
– मंजूर होने के बाद इंश्योरेंस प्लान के नियम व शर्तें तय की जाती हैं.
– इसके बाद आवेदक समय-समय पर जरूरी प्रीमियम राशि भरता है.
– जब जरूरत होती है, उस मामले में पॉलिसी के एवज में क्लेम किया जाता है.
– अगर यह सही पाया जाता है तो एजेंसी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करती है और लोन रीपेमेंट की राशि जारी कर देती है.

बिजनेस लोन इंश्योरेंस के प्रावधान

बिजनेस लोन इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर तीन मुख्य पहलुओं को कवर करता है:

लाइफ इंश्योरेंस:  किसी मुख्य पार्टनर या फिर मालिक की मौत में यह कवर प्रदान किया जाता है. यह कवर पर्याप्त राशि देता है ताकि लोन को पूरी तरह चुकाया जा सके. अगर आवेदक को पहले से ही कोई बीमारी है, जिससे शख्स मानसिक रूप से बीमार हो गया है और उसके पास कुछ ही महीने शेष हैं तो इंश्योरेंस कवर में मौत से पहले भी कुछ फायदे मिल जाते हैं.

एक्सीडेंट के लिए कवरेज: अगर आवेदक किसी हादसे में गंभीर रूप से घायल हो जाता है तो उस मामले में भी सुरक्षा कवर मुहैया कराया जा सकता है.  इस पॉलिसी को या तो अलग से या फिर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में जोड़ा जा सकता है. पहले से तय लोन प्रतिशत राशि इंश्योरेंस एजेंसी या बैंक देता है.

विकलांगता कवरेज: यह मानसिक व शारीरिक दोनों ही विकलांगताओं को उस हद तक कवर करता है, जिसमें मालिक अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर सकता. एक्सीडेंटल इंश्योरेंस की तरह ही, इसमें भी पहले से तय लोन प्रतिशत के हिस्से का भुगतान किया जाता है. इसमें समय सीमा भी शामिल होती है.

इन सभी मामलों में, पॉलिसी के खास नियमों और शर्तों के आधार पर, लोन बीमा इसमें मदद करता है-
– शुरुआती एकमुश्त राशि जारी करना और
– निश्चिय समय अवधि के लिए नियमित आय की गारंटी

बिजनेस लोन इंश्योरेंस के फायदे

– बिजनेस के सामने आने वाले वित्तीय संकटों को घटाना
– अनिश्चित क्षति की कवरेज
– वित्तीय परेशानी से परिवार और बिजनेस पार्टनर्स को बचाना.
– बिजनेस की मेंटेनेंस और दिवालियापन से बचाना.
बिजनेस की विश्वसनीयता, क्रेडिट स्कोर और इज्जत बढ़ाना.

टैक्स छूट: आयकर अधिनियम के सेक्शन 80सी के तहत, किसी भी लाइफ इंश्योरेंस कवर में टैक्स छूट मिलती है. चूंकि बिजनेस लोन इंश्योरेंस मौत की स्थिति में कवरेज देते हैं, वे खुद ब खुद लाइफ इंश्योरेंस की श्रेणी में आ जाते हैं और ग्राहक उसमें टैक्स छूट क्लेम कर सकता है.

बिजनेस लोन इंश्योरेंस के दौरान बरतें ये सावधानियां, इन बातों पर करें विचार

चूंकि लोन इंश्योरेंस की प्रकृति (एक्सीडेंटल, मौत या विकलांगता) अलग होती है, जिसमें अलग-अलग शर्तें व नियम होते हैं (कवरेज अमाउंट प्रीमियम कॉस्ट, टाइम पीरियड इत्यादि). ऐसे में एक सही प्रोटेक्शन जरूरी है. यह चॉइस बिजनेस के मालिक या फिर मुख्य पार्टनर की स्वास्थ्य की स्थिति, बिजनेस के साइज, फंड की उपलब्धता, कंपनी की इज्जत और फ्यूचर प्रोजेक्शन्स इत्यादि पर निर्भर करती है.

कोई भी पॉलिसी एक कीमत पर आती है और यह कीमत तय चयन के आधार पर अलग-अलग होती है. ऐसे में एक समझदार चयन और यहां तक कि इस बात पर विचार करना कि क्या सुरक्षा योजना की जरूरत है, अनिवार्य है. शुरुआती फैसले के बाद, सारे खंडों के बारे में सावधानीपूर्वक पढ़ें ताकि यह पता चल जाए कि सारी जरूरतें उस कीमत पर पूरी हो रही हैं, जो बिजनेस के लिए सुविधाजनक है.

नुकसान या क्षति में नहीं आने वाले खंड: बीमा के प्रकार के बारे में फैसला लेते समय यह एक और बहुत अहम बात है. सारी प्रोटेक्शन पॉलिसियां, जिसमें लोन इंश्योरेंस भी शामिल होता है, वे सभी कुछ क्लॉज या डिस्क्लेमर के साथ आती हैं कि ये चीजें कवर नहीं की जाएंगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्या वाकई प्लान काम का है, आपकी जरूरतों और शर्तों, जिसमें बिजनेस काम करता है, उसकी इंश्योरेंस के खंडों से तुलना करनी चाहिए. आइए आपको बताते हैं कि कौन सी स्थितियों में नुकसान पॉलिसी में कवर नहीं होता.

पॉलिसी फैक्टर्स
-सरकारी कार्रवाई
-मिलिट्री एक्टिविटी
-संबंधित कानून और प्रवर्तन

एंटरप्राइज और उसके कंपोनेंट्स
-प्रॉपर्टी के साइज और वैल्यू में बदलाव
-मशीन में टूट-फूट
-पावर फेल्योर

कुछ बाहरी फैक्टर्स
-न्यूक्लियर एक्टिविटी के कारण नुकसान
-आसपास मौजूद वन्य जीवों के कारण नुकसान
-स्थानीय प्रदूषण के कारकों की वजह से नुकसान

बिजनेस के मालिकों द्वारा कानून का पालन न करना.

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