लोन के लिए कम अवधि चुननी चाहिए या लंबी? जानिए

Should you Choose Long-Term or Short-Term Tenure for a Loan?

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए आसान तरीका है पर्सनल लोन, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से उपलब्ध है. न्यूनतम दस्तावेजों के साथ आपको बिना झंझट लोन मिल जाता है. कुछ पेशेवरों को बैंक प्री-अप्रूव पर्सनल लोन भी देते हैं. ब्याज दर आपकी एलिजिबिलिटी के मुताबिक हर कर्जदाता की अलग-अलग होती है. आपको क्रेडिट विश्वसनीयता के आधार पर 25 हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. नए दौर के अधिकतर कर्जदाता भुगतान में ग्राहकों को फ्लेक्सिबिलिटी के साथ-साथ न्यूनतम या नो फोरक्लोजर चार्जेज की सुविधा देते हैं.

आप किस तरह अलग लोन अवधि का फायदा उठा सकते हैं?

हम लोन की अवधि के आधार पर लोन को दो श्रेणियों में अलग कर सकते हैं. आइए उनकी विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं:

शॉर्ट टर्म लोन्स: इन लोन्स में भुगतान की अवधि 24 महीने या उससे कम की होती है. ये लोन उन लोगों के लिए काफी मददगार हैं, जो छोटी राशि के लोन की तलाश में हैं. ये असुरक्षित लोन होते हैं, जिसके लिए आपको कोई चीज गिरवी नहीं रखनी पड़ती. साथ ही, आपको न्यूनतम दस्तावेजों के साथ ये लोन मिल जाता है. किसी भी ऑनलाइन कर्जदाता से आप ये शॉर्ट टर्म पर्सनल लोन ले सकते हैं. चूंकि लोन की अवधि कम है इसलिए ब्याज दरें ज्यादा होंगी.

लॉन्ग टर्म पर्सनल लोन: पर्सनल लोन के मामले में लोन की अवधि 24-60 वर्ष तक की होती है. अन्य प्रकार के लोन्स (होम लोन्स) के लिए अवधि 30 साल तक भी हो सकती है. ये लोन्स ज्यादा राशि और आपकी लंबी समय की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं. इसके लिए आपको सिक्योरिटी देनी या नहीं देनी पड़ सकती है. यह कर्जदाता पर निर्भर करता है. लंबी अवधि वाले लोन्स की ब्याज दर छोटी अवधि वाले लोन की तुलना में कम होती है. आप लंबी अवधि के लोन्स में  कर्जदाता के साथ मोलभाव कर सकते हैं.

लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म के लोन्स में फर्क क्या है?

दोनों ही तरह के लोन्स के अपने फायदे और नुकसान हैं. आपकी खास जरूरतों के आधार पर ही तय होगा कि आपके लिए किस तरह का लोन सही रहेगा. नीचे हम आपको दोनों ही तरह के लोन्स की तुलना के बारे में बता रहे हैं. इस सूचना के जरिए आप तय कर सकते हैं कि किस तरह की फंडिंग आपको चाहिए. अपनी जरूरत को पहचानें, बजट बनाएं, उपलब्ध उत्पादों की तुलना करें और फिर अपना लोन चुनें.

फैक्टर्स

शॉर्ट टर्म

लॉन्ग टर्म

अवधिइन लोन्स का कार्यकाल 24 महीने से कम या उसके बराबर होता है.इन लोन्स का कार्यकाल 24 महीने से अधिक होता है. पर्सनल लोन की अवधि 24 महीने से 60 महीने तक की हो सकती है.
ब्याज दरइन लोन्स की ब्याज दर अधिक होती है क्योंकि इनका कार्यकाल कम है.इन लोन्स की ब्याज दर कम होती है क्योंकि लोन की अवधि ज्यादा होती है.
दस्तावेजदस्तावेज कम लगते हैं.कर्जदाता को लंबी अवधि के लोन के मामले में अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है.
गारंटीकिसी सिक्योरिटी या गारंटी की जरूरत नहीं पड़ती.अगर कर्जदाता आपकी लोन चुकाने की क्षमता को लेकर आश्वस्त नहीं है, तो आपको अपने लोन के खिलाफ सुरक्षा के रूप में जमानत या गारंटर देने के लिए कहा जा सकता है.
खास जरूरतेंशॉर्ट टर्म लोन कम राशि की आपकी कम अवधि की जरूरतों को कवर करने के लिए मुफीद हैं.लंबी अवधि के लोन आपकी लंबी अवधि की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुफीद होते हैं, जिसमें बड़ी राशि शामिल होती है.
पहुंचशॉर्ट टर्म लोन आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हैं. आप 24-36 घंटे में फंड हासिल कर सकते हैं.ये लोन आप बैंक या ऑनलाइन भी ले सकते हैं.
ईएमआई की राशिशॉर्ट टर्म लोन्स की ईएमआई ज्यादा होती है क्योंकि पुनर्भुगतान की अवधि 24 महीने से कम होती है.इसमें किस्त लंबी अवधि तक देनी पड़ती है, जिससे हर महीने दी जाने वाली ईएमआई कम हो जाती है.
फंड के इस्तेमाल पर प्रतिबंधइस पर कोई पाबंदी नहीं कि आप पैसा कहां खर्च करते हैं.आप जहां चाहें और जैसे चाहें फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं. पैसे के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
उदाहरणवेडिंग लोन , ट्रैवल लोन, क्रेडिट कार्ड, टेकओवर लोन,  एडवांस सैलरी लोनहोम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन

 

कौन सा लोन आपको चुनना चाहिए?

– जब आप शॉर्ट टर्म लोन्स चुनते हैं तो चुकाए गए ब्याज की कुल राशि लॉन्ग टर्म लोन से कम होती है. लिहाजा, अगर आप कम ब्याज दरों पर अपनी जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा ईएमआई देनी होगी. शॉर्ट टर्म लोन चुनेंगे तो लॉन्ग टर्म लोन की तुलना में आपको कम भुगतान करना होगा.

– अगर मासिक भुगतान की एक सीमा है तो आपको लॉन्ग टर्म लोन का विकल्प चुनना चाहिए क्योंकि इससे ईएमआई कम हो जाएगी.

– अगर आप छोटी राशि चाहते हैं तो शॉर्ट टर्म लोन बेहतर है लेकिन जब फंड की जरूरत बड़ी हो तो लॉन्ग टर्म लोन्स और अच्छा विकल्प है.

लॉन्ग टर्म लोन्स क्रेडिट रिकॉर्ड्स के लिए बेहतर होते हैं क्योंकि इनकी अवधि लंबी होती है. साथ ही ईएमआई चुकानी भी आसान होती है. वक्त पर लोन चुकाने से आपके क्रेडिट स्कोर पर सकारात्मक असर पड़ता है.

पर्सनल ओवरड्राफ्ट सुविधा को अतिरिक्त विकल्प के रूप में रखें

व्यक्तिगत ओवरड्राफ्ट क्रेडिट का एक रूप है जो इस कदम पर नकदी मुहैया कराता है. ओवरड्राफ्ट सुविधा क्रेडिट कार्ड की तरह होती है. आप जरूरत के मुताबिक कई निकासी कर सकते हैं और आपको पैसों की उपलब्धता के आधार पर चुकाने का विकल्प मिलता है. आप केवल उतनी राशि पर ब्याज का भुगतान करते हैं, जितने दिन आप उसका इस्तेमाल करते हैं. एक बार एप्लिकेशन प्रोसेस होने और एलिजिबिलिटी पॉजिटिव निकलने के बाद राशि आपके अकाउंट में क्रेडिट हो जाती है. आप एक लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन अपनी क्रेडिट विश्वसनीयता के आधार पर ले सकते हैं. पर्सनल ओवरड्राफ्ट के मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:

– प्रोसेसिंग और वितरण की प्रक्रिया झंझट रहित और तेज है.
– न्यूनतम दस्तावेज लगते हैं.
– ज्यादा ईएमआई नहीं होती.
– फ्लेक्सिबल रीपेमेंट के विकल्प उपलब्ध हैं. आपको तभी ब्याज देना है, जब आप राशि की निकासी करेंगे.
– क्रेडिट कार्ड और शॉर्ट टर्म लोन्स की तुलना में ब्याज दरें कम हैं.
– आप एक साथ कई निकासी कर सकते हैं. ब्याज सिर्फ उसी राशि पर लगेगा, जो आप निकालेंगे और जितने दिनों के लिए आप फंड का इस्तेमाल करेंगे.

बाजार में कई वित्तीय उपकरण मौजूद हैं. हर किसी की खासियतें और फायदे अलग-अलग होते हैं. इसलिए यह जरूरी है कि आप लोन की जरूरत और क्षमता के आधार पर समझदारी से चुनाव करें.

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