कोरोना संकट: क्या है RBI की तीन महीने तक ईएमआई में मोहलत का सच

देश में इस वक्त जो मौजूदा हालात हैं, वो किसी से छिपे हुए नहीं हैं. भारत में इस वक्त एक मेडिकल इमरजेंसी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया हुआ है. इस घोषणा के बाद पूरे देश में सब कुछ थम सा गया है सिवाय उत्पादन और जरूरी सामानों की सप्लाई के. ऐसी स्थिति में जिन लोगों ने लोन लिया हुआ है, वे चिंतित हैं और होना बनता भी है.

जिन लोगों ने लोन लिया है, वे लॉकडाउन में इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनका बिजनेस ठप पड़ा है. उन्हें कोई मुनाफा नहीं हो रहा तो वे कैसे ईएमआई का भुगतान करेंगे?

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक हल ढूंढ निकाला है. केंद्र सरकार के निर्देश पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों से जून 2020 तक कोई ईएमआई न लेने को कहा है.

देशभर में लॉकडाउन को देखते हुए यह उन ग्राहकों के लिए राहत की बात है, जिन्हें ईएमआई चुकाने में मुश्किलें हो रही हैं. आरबीआई के इस निर्देश के तहत, बैंक और एनबीएफसी उन सभी ग्राहकों को तीन महीने की मोहलत देंगे, जिन्होंने टर्म लोन ले रखा है.

इसके अतिरिक्त आरबीआई ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों जैसे CIBIL और Equifax को निर्देश दिया है कि मोहलत की अवधि में ईएमआई नहीं चुकाने से ग्राहकों की क्रेडिट रिपोर्ट पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. आइए आपको बताते हैं कि कैसे यह छोटे व्यापारियों के लिए फायदेमंद है, जिनका बिजनेस लोन अकाउंट चल रहा है.

किस तरह के लोन अकाउंट्स को इससे फायदा होगा?

आरबीआई की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, बैंक और एनबीएफसी 1 मार्च से 31 मई 2020 के बीच की अवधि के टर्म लोन की ईएमआई स्थगित कर देंगे. अब इन टर्म लोन्स में होम लोन, वीकल लोन, बिजनेस लोन, पर्सनल लोन, क्रॉप लोन और एग्रीकल्चरल टर्म लोन्स शामिल हैं. इसके अलावा बैंकों की ओर से जारी क्रेडिट कार्ड की ईएमआई भी नहीं वसूली जाएगी. इन तीन महीनों में मोहलत मूल राशि और ब्याज दोनों पर दी जाएगी. ग्राहक को इस अवधि में ईएमआई नहीं चुकानी पड़ेगी.

क्या लोन के ब्याज को माफ कर दिया जाएगा?

ऋण स्थगन (Moratorium) का मतलब होता है कि आपको उस अवधि में ईएमआई नहीं चुकानी पड़ेगी और कोई पेनाल्टी भी नहीं लगेगी. यह कोई छूट नहीं है सिर्फ ग्राहकों को राहत देने के लिए रियायत दी गई है. आरबीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, टर्म लोन के भुगतान को तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया जाएगा. यानी आप इन तीन महीनों की ईएमआई को बाद में चुकाएंगे. लेकिन इस अवधि में बकाया राशि पर ब्याज लगता रहेगा.

आरबीआई ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए ऋण स्थगन अवधि सभी ग्राहकों को मुहैया कराई जाएगी ताकि देश में कैश की कमी न हो. ध्यान दें कि ईएमआई को टालना किसी तरह की माफी नहीं है और न ही टर्म लोन के किसी नियम व शर्त में बदलाव होगा.

इतना ही नहीं, कई नौकरीपेशा लोगों की सैलरी भी कटेगी या आने में देरी होगी. कोरोना (कोविड-19) के संकट के मद्देनजर उनकी नौकरी भी जा सकती है. लिहाजा इस मोहलत से उन ग्राहकों को फायदा होगा, जो पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं. वे 31 मई के बाद ईएमआई दोबारा चुकाना चालू कर सकते हैं.

ग्राहकों को एक बात समझनी होगी कि यह मोहलत सिर्फ 1 मार्च से 31 मई 2020 तक के लिए ही है. उदाहरण के तौर पर, अगर आपने बिजनेस लोन लिया है और आपको महीने के पहले हफ्ते में ईएमआई चुकानी होती है और आपने मार्च के महीने में बिजनेस लोन की ईएमआई चुका दी है तो आपको सिर्फ दो महीने का ही फायदा मिलेगा.

क्या आपको अगले महीने ईएमआई देनी होगी?

ऐसा नहीं है कि आपको 1 मार्च से लेकर 31 मई 2020 की ईएमआई या क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं देना होगा, भले ही आप भुगतान करना चाहें. बैंकों और एनबीएफसी को अभी इस मामले पर अधिक स्पष्टता देना बाकी है. लेकिन मोहलत एक विकल्प है. अगर ग्राहक फिर भी अपनी ईएमआई का भुगतान करते रहना चाहता है, तो वह कर सकता है. हर लोन देने वाले संस्थान की ओर से इस पर सफाई की उम्मीद है. उनको अपने पैमाने बनाने होंगे. आरबीआई ने बैंकों और अन्य कर्जदाता से मोहलत को लेकर बोर्ड के द्वारा मंजूर नियम देने को कहा है ताकि ग्राहकों को राहत दी जा सके.

गौरतलब है कि आरबीआई ने शर्तों को तय करने के लिए सभी कर्जदाताओं को अधिकार दे दिया है. हालांकि, कर्जदाताओं स्थगन अवधि के लिए पैमाना भी लेकर आना होगा.

कौन दे सकता है मोहलत?

सभी बैंक व वित्तीय संस्थान, जिनमें नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFC), फाइनेंस कंपनियां, रीजनल रूरल बैंक, फाइनेंस बैंक, लोकल एरिया बैंक और छोटे फाइनेंस बैंक मोहलत दे सकते हैं. अगर आपने असुरक्षित बिजनेस लोन या होम लोन लिया है तो आपको तीन महीनों की मोहलत दी जाएगी.

क्या आपको इसे चुनना चाहिए?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि मोहलत का मतलब छूट नहीं है. इसलिए मोहलत की अवधि में भी ब्याज लगता रहेगा. आसान शब्दों में तीन महीनों का जो भी ब्याज होगा, वो बकाया राशि में जुड़ जाएगा और अवधि खत्म हो जाने के बाद इससे आप पर अतिरिक्त भार ही पड़ेगा. इस अवधि के बाद आपको ईएमआई में ही इस राशि को चुकाना होगा. लिहाजा, अगर आप कैश की कमी से जूझ रहे हैं तो तभी हम आपको ऋण स्थगन चुनने की सलाह देंगे. वरना आप अपनी ईएमआई पहले की तरह चुकाना जारी रख सकते हैं.

विशेष तौर पर, यह एक स्थगन अवधि है ब्याज माफी नहीं. इस प्रकार, आपसे ब्याज लिया जाएगा. इसलिए, जो लोग इन तीन महीनों के दौरान ईएमआई का भुगतान नहीं कर सकते हैं, उन्हें ही इसका विकल्प चुनना चाहिए. वरना अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए ईएमआई का भुगतान जारी रखें.

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