क्या होता है ब्याज दर कैलकुलेटर, जानें इसके बारे में हर बात

अगर आप बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से अपनी पैसों की जरूरतें पूरी करने के लिए लोन लेना चाहते हैं तो आपको ब्याज दरों के बारे में भी बताया जाता है. जिस दर पर ब्याज लगाया जाता है, उसी के मुताबिक आप बजट प्लान बनाते हैं. लेकिन आपको यह मालूम नहीं होगा कि किन तरीकों से वित्तीय संस्थान लोन पर ब्याज दर तय करते हैं.

कैसे ब्याज दर कैलकुलेटर आपकी मदद करता है:

सटीक ब्याज दर बताने के अलावा यह:

– आपको बकाया क्षमताओं के बराबर रखता है.
– आपके पुनर्भुगतान बकाये को चेक करने की सहूलियत देता है, जिससे आपके क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है.
– अगर आपके कई लोन चल रहे हैं तो आपको यह सुविधा देता है कि कौन की ईएमआई बाद में चुकानी है और कौन सी पहले.
– मैनुअल कैलकुलेशन्स की परेशानियों से बचाता है और आपको फाइनेंस पर अपडेट रखता है.

इससे पहले कि हम इंट्रस्ट रेट कैलकुलेटर के विभिन्न हिस्सों के बारे में बताएं, आइए आपको बताते हैं कि इंट्रस्ट रेट और फॉर्म्युले होते क्या है.

क्या होती है ब्याज दर?

पैसे उधार के इस्तेमाल के लिए या किसी लोन की अदायगी में देरी के लिए किसी खास दर पर नियमित रूप से भुगतान किया गया पैसा ब्याज के रूप में जाना जाता है.

आसान शब्दों में, उधार दिए गए पैसे की कीमत ब्याज है. एक कर्जदाता उधार लेने वाले से ब्याज के तौर पर लोन का अनुपात लेता है, जिसे आमतौर पर लोन के सालाना प्रतिशत के रूप में लिया जाता है.

ब्याज दर तय करने का फॉर्म्युला

ईएमआई में ब्याज दर और कुल देय राशि तय करने का फॉर्म्युला है:

E = P * r * (1+r)^n / ((1+r)^n-1)

यहां

E – चुकाने वाली ईएमआई
P – प्रिंसिपल लोन अमाउंट
R/r – लागू होने वाला ब्याज दर
N/n – वर्षों में कार्यकाल

समय के साथ आपको पता चलेगा कि मासिक ब्याज दर घट रही है. इसी के साथ लोन के एवज की राशि भी घट हो जाती है. आमतौर पर, पर्सनल लोन कर्ज लेने वालों को एक तय ब्याज दर पर दिए जाते हैं और पूरे कार्यकाल में यह बदलते नहीं हैं.

फिक्स्ड इंट्रस्ट रेट पैटर्न में ग्राहक पूरी अवधि में तय प्रतिशत में लोन की ईएमआई चुकाता है. लंबी अवधि के लिए बजट प्लान करने के लिए यह आदर्श स्थिति है, जो बाजार में आने वाले बदलाव से प्रभावित नहीं होती.

एक बदलने वाली ब्याज दर भी है, जिसमें समय के साथ उतार-चढ़ाव होते हैं. उतार-चढ़ाव मूल रूप से मुद्रास्फीति या बाजार सूचकांक जैसे कारकों पर निर्भर करता है. फ्लोटिंग ब्याज दर लोन, फंड-आधारित उधार दर की सीमांत लागत से जुड़ा है. फ्लोटिंग रेट का मुख्य फायदा ये है कि ये थोड़ी सस्ती ब्याज दरों पर उपलब्ध हैं.

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ब्याज दरों को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

ब्याज दरों को प्रभावित करने वाले कई फैक्टर्स हैं जो लोन लेने वालों को उनके लोन पर मिलते हैं. आमतौर पर इन्हें कंट्रोल नहीं किया जा सकता है, लेकिन इनकी समझ होना मददगार साबित होता है.

बेरोजगारी दर:

जब बेरोजगारी दर कम होती है तो महंगाई बढ़ती है और बिजनेस ज्यादा लागत पर होते हैं. एक अर्थव्यवस्था में, इसके उलट, जब रोजगार कम होता है, उपभोक्ता गतिविधियां बहुत होती हैं, जिससे ब्याज दरें बढ़ती हैं.

सप्लाई और डिमांड

साधारण डिमांड और सप्लाई लोन पर ब्याज दर को प्रभावित करती है. जब बाजार में पैसे या लोन की जरूरत बढ़ जाती है, तो कर्जदाता दरें बढ़ा देते हैं और जब क्रेडिट की मांग कम हो जाती है, तो ज्यादा उधार लेने वालों को लुभाने के लिए दरों को कम किया जाता है.

आर्थिक गतिविधियां

जब ब्याज दरें कम हो जाती हैं तो इसकी संभावना ज्यादा होती है कि लोग बिजनेस को फैलाने, प्रॉपर्टी या कार जैसी ज्यादा लागत की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे उधार लें. इससे लोगों की खर्च करने की ताकत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में भी जान आएगी. मूल रूप से सेंट्रल बैंक इकोनॉमी को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों को मुख्य उपकरण की तरह इस्तेमाल करते हैं. आमतौर पर जब अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो रही होती है तो सेंट्रल बैंक ब्याज दरें कम कर देते हैं और तेज होने पर बढ़ा देते हैं.

आर्थिक नीतियां और महंगाई

केंद्र सरकार की ओर से तय की गईं मौद्रिक नीतियां देश की अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को काफी हद तक प्रभावित करती हैं. ब्याज दरों को प्रभावित करने वालों में महंगाई भी शामिल है. सामान और सर्विसेज के दामों में इजाफा दिखाता है कि लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो रही है. मैक्रोइकोनॉमिक लेवल पर यह ब्याज दरों के साथ नजदीकी से जुड़ा है और बड़े पैमाने पर परिवर्तन या तो अन्यों पर इसका असर पड़ेगा.

 

नियंत्रण कारक जो ब्याज दर निर्धारित करते हैं

किसी शख्स की क्रेडिट रिपोर्ट ब्याज दरें तय करने में अहम भूमिका निभाती है. जितना अच्छा क्रेडिट स्कोर होगा उतने ही चांस आपको बेहतर ब्याज दर पर अच्छी डील मिलने के होंगे. इसके अलावा उधार ली गई राशि भी लोन के ब्याज दर पर असर डालती है. यह डिमांड का एक आसान समीकरण है और सप्लाई की मांग ज्यादा होगी तो दरें ज्यादा होंगी. जब बहुत से लोगों को लोन की जरूरत नहीं होती है और उधार देने के लिए बहुत पैसा होता है, तो ब्याज दर कम हो जाती है.

एक अच्छा क्रेडिट स्कोर ग्राहक की बेहतर ब्याज दरों पर लोन लेने में मदद करता है. ये वो चीजें हैं,  जिनके जरिए कर्जदाताओं से बेहतर ब्याज दर हासिल करने पर ध्यान दिया जा सकता है. इनके बारे में आइए बात करते हैं.

जल्दी-जल्दी क्रेडिट न लें: जल्दी-जल्दी क्रेडिट के बारे में पूछताछ करने का मतलब होता है कि  ग्राहक को लोन मिलने में मुश्किल हो रही है. कर्जदाता उसे जोखिम वाला ग्राहक मानता है.

जहां सही लगे, वहां से अवसर का लाभ लें: अर्थव्यवस्था में जब मंदी आती है तो यह ग्राहकों के लिए लोन लेने का सही समय होता है. जब लोन लेने वाले कम ग्राहक होते हैं तो ब्याज दर भी कम होती है. ऐसी स्थिति में आप कम ब्याज दरों में लोन ले सकते हैं.

सुरक्षित लोन: कर्जदाता जब अपने पास कोई चीज गिरवी रखवा लेते हैं तो वे आराम महसूस करते हैं. बिना सिक्योरिटी के लोन में ब्याज दर ज्यादा होती है. ग्राहक कम दरों पर लोन लेने के लिए ग्राहक कोई चीज गिरवी रख सकते हैं.

रिसर्च बेहद जरूरी है: जोखिम के आकलन का पैमाना हर कर्जदाता का अलग-अलग होता है. पहले लोन पर मन जमाने से अच्छा है कि आप अपने आसपास देखें. आप ऑफर्स और फायदों के बारे में हर कर्जदाता से मोलभाव करें. इसी दौरान आपको नियम व शर्तों और अतिरिक्त चार्जेज के बारे में भी मालूम करना होगा.

भुगतान अवधि: डाउन पेमेंट के तौर पर छोटी राशि देना और लंबी लोन अवधि चुनने से आपको बढ़ी हुई ब्याज दर चुकानी पड़ती है. इससे कर्जदाता जोखिम में होते हैं. ज्यादा डाउन पेमेंट और कम अवधि होने से कर्जदाता कम ब्याज दर ऑफर करते हैं.

इसलिए लोन के लिए कोई डील फाइनल करने से पहले इंट्रस्ट रेट कैलकुलेटर के जरिए सभी नियम पता कर लें. जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं तो ब्याज दरें विचार करने के लिए एक अहम फैक्टर होता है. यह 4 फैक्टर्स में से एक है, जिसमें से कैलकुलेटर एक को बताता है.

ब्याज दर कैलकुलेटर किसी भी अनजान वैरिएबल को तय करने में मदद करता है, जिससे उधार लेने वाले को अच्छा फैसला लेने के लिए ज्यादा विस्तृत जानकारी मिलती है.

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