जानिए होम लोन ब्याज दर पर कौन सी चीजें असर डालती हैं?

ऐसे कई फैक्टर्स हैं, जो होम लोन ब्याज दरों को प्रभावित करते हैं. इनमें से कुछ फिक्स्ड होते हैं, जैसे आरबीआई की रेपो रेट या फिर बैंक की एमसीएलआर रेट, जबकि कुछ परिवर्तनशील होती हैं. आज हम इस आर्टिकल में आपको उन फैक्टर्स के बारे में बताएंगे, जो आपके होम लोन की ब्याज दरों को प्रभावित करते हैं.

MCLR रेट्स

MCLR या फिर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिस पर हर बैंक कर्ज देता है. हालांकि अन्य फैक्टर्स जैसे ऑपरेटिंग कॉस्ट, मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स, द कैश रिजर्व रेश्यो (CRR), उस पर कोई नकारात्मकता और टेनॉर प्रीमियम इसमें अहम रोल अदा करते हैं. इसमें MCLR के लिए एक सालाना रीसेट डेट होती है, जिसमें बैंक मौजूदा होम लोन खरीददारों के रेट्स को रिव्यू करते हैं. रीसेट तारीख पर MCLR अगले साल की रीसेट तारीख तक प्रासंगिक बनी रहती है, भले ही यह बीच में कोई भी बदलाव दिखाए. इसका मतलब है कि एमसीएलआर दर में बदलाव के आधार पर ब्याज दर में इजाफा या कमी हो सकती है.

विभिन्न प्रकार के ब्याज

आप फिक्स्ड रेट, फ्लोटिंग रेट और मिक्स्ड इंट्रस्ट रेट चुन सकते हैं. फिक्स्ड ब्याज दरों में ब्याज दर पूरी अवधि में एक समान रहती हैं. फ्लोटिंग ब्याज दरों में बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा किसी बदलाव पर निर्भर करता है. उदाहरण के तौर पर अगर आरबीआई के नए नियमों में ब्याज दर कम है तो ईएमआई कम होगी और ज्यादा है तो ज्यादा होगी. होम लोन की मिक्सड ब्याज दरों में यह एक अवधि तक यह फिक्स्ड ब्याज दर से शुरू होती है और फिर फ्लोटिंग ब्याज दर की ओर चली जाती है.

लोन टू वैल्यू  (LTV) रेश्यो

लोन टू वैल्यू या एलटीवी प्रॉपर्टी वैल्यू का वो प्रतिशत होता है, जिसे लोन के जरिए फाइनेंस किया जा सकता है. लोन की ज्यादा मात्रा से ज्यादा ब्याज लगेगा क्योंकि इसमें पैसों को लेकर बड़ा जोखिम शामिल होगा. दूसरी ओर, ज्यादा डाउन पेमेंट से लोन की मात्रा घट जाएगी, जिससे ब्याज दरों में गिरावट आएगी.

क्रेडिट स्कोर

ब्याज दरों पर क्रेडिट स्कोर भी काफी असर डालता है. क्रेडिट स्कोर रीपेमेंट हिस्ट्री, वित्तीय आदतों और अनुशासन व विश्वसनीयता का एक स्टेटमेंट होता है. कम क्रेडिट स्कोर होने से पैसों का जोखिम ज्यादा रहता है और अपने जोखिम को पूरा करने के लिए कर्जदाता ज्यादा ब्याज दर लगाते हैं. दूसरी ओर, ज्यादा क्रेडिट होने पर पैसों का जोखिम कम रहता है और कर्जदाता आपको कम ब्याज दरों पर लोन देते हैं.

प्रॉपर्टी की लोकेशन

प्रॉपर्टी की लोकेशन भी ब्याज दरें निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाती है. जिस प्रॉपर्टीज के आसपास अच्छी कनेक्टिविटी, शानदार बुनियादी सुविधाएं जैसे स्कूल, हॉस्पिटल्स और मार्केट प्लेस इत्यादि होते हैं, उनकी रीसेल वैल्यू बहुत ज्यादा होती है. दूसरी ओर, कम वांछित जगह पर संपत्ति सस्ती दर पर आ सकती है, लेकिन रीसेल वैल्यू कम होगी. कर्जदाता ऐसी प्रॉपर्टीज को देखते हैं, जिनकी ज्यादा रीसेल वैल्यू होती है क्योंकि वे लुभावनी होती हैं. लिहाजा वे उस पर कम ब्याज दर लगाते हैं जबकि जिन घरों की रीसेल वैल्यू कम होती है उनके लिए ब्याज दर ज्यादा होती है.

जॉब प्रोफाइल

जिन लोगों की आय का स्रोत स्थिर होता है, वे कम जोखिम वाले माने जाते हैं जबकि जिनकी आय स्थिर नहीं होती, वे अधिक जोखिम वाले होते हैं. होम लोन की कम ब्याज दरें उन होम लोन ग्राहकों को दी जाती हैं, जिनकी आय स्थिर होती है. नौकरीपेशा, पेशेवर, पीएसयू, सरकारी कर्मचारी और जो लोग बड़ी प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं, वे इस श्रेणी में आते हैं. डॉक्टर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट इत्यादि खुद के रोजगार वालों में कम जोखिम की श्रेणी में आते हैं.

होम लोन की अवधि

अधिक अवधि वाले लोन की तुलना में (जिनकी ईएमआई कम होगी लेकिन ब्याज दर ज्यादा) छोटी अवधि वाले लोन कम ब्याज दर वाले होते हैं (भले ही ईएमआई ज्यादा हो). एक आसान होम ऑनलाइन ईएमआई कैलकुलेटर आसानी से आवेदक को लोन की सर्वश्रेष्ठ अवधि चुनने में मदद कर सकता है.

जिन फैक्टर्स का ऊपर जिक्र किया गया है, वे बेहद अहम कारण हैं, जो होम लोन की ब्याज दर पर प्रभाव डालते हैं. इनमें से कुछ हमारे नियंत्रण में होते हैं जबकि अन्यों पर अर्थव्यवस्था का असर पड़ता है. होम लोन्स के बारे में फैसला लेने से पहले अगर आप ऊपर बताई गईं बातों को ध्यान में रखेंगे तो लोन की बेहतर वैल्यू आपको अपनी जरूरतों और बजट में मिल जाएगी.

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