पहली बार बिजनेस लोन: इन तीन आसान तरीकों से पाएं अपना पहला बिजनेस लोन

छोटे और मध्यम उद्योगों में कई प्रकार के ऐसे लोन हैं, जो बिजनेस मालिक जरूरत के वक्त चुन सकते हैं. कई बार कुछ बिजनेस वर्षों तक चलते हैं, स्थापित होते हैं और फिर वे बड़े निवेश, प्रोजेक्ट या अधिग्रहण के लिए बड़ा लोन लेते हैं. ऐसे कारोबार के लिए लोन पाना आसान होता है. कई बार, छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए अपना पहला लोन लेना आसान नहीं होता और यह एंटरप्रेन्योर के लिए बहुत मुश्किल काम बन जाता है.

aएक मजबूत क्रेडिट स्कोर, बिजनेस का कई वर्षों का अनुभव, स्थिर राजस्व और मुनाफा इत्यादि. ये ऐसी बातें हैं, जिन पर बैंक बिजनेस लोन अप्रूव करने से पहले विचार करता है. लेकिन कुछ कारोबारियों के हक में इतने मजबूत पक्ष नहीं होते और लोन पाने के लिए उन्हें काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. बैंक और अन्य कर्जदाता संस्थानों के मुताबिक, छोटे कारोबार को फंड देने में बड़ा रिस्क होता है. वे अनिश्चित होते हैं कि बिजनेस सफलतापूर्वक चलेगा या कुछ ही वर्षों में बंद हो जाएगा. इसलिए चिंता का विषय यही होता है कि लोन की राशि वापस मिलेगी या उसे बैड लोन की श्रेणी में डालना पड़ेगा. लेकिन कारोबारियों को निराश होने की जरूरत नहीं है. चूंकि कई ऐसे संस्थान हैं, जो छोटे एवं मध्यम कारोबारियों को लोन देकर चांस लेना पसंद करते हैं. सिर्फ इसके लिए कुछ पैमानों को पूरा करने की जरूरत है.

क्रेडिट स्कोर

एक कारोबारी, अपने पर्सनल क्रेडिट स्कोर के आधार पर छोटा बिजनेस लोन हासिल कर सकता है. जैसे कोई शख्स पर्सनल लोन, कार लोन, स्टूडेंट लोन क्रेडिट स्कोर के आधार पर हासिल करता है, वह अपने बिजनेस के लिए कर सकता है. क्रेडिट स्कोर से कर्ज देने वाला यह पता लगाता है कि कारोबारी कितना विश्वसनीय है.

ऐसा सोचना सुरक्षित माना जाता है कि जो कानून का पालन करता है और अपने निजी वित्तीय मामलों को लेकर जिम्मेदार है, वो यही रुख बिजनेस में भी दिखाएगा. इस तरह, एक अच्छा निजी क्रेडिट स्कोर कारोबारियों के लिए बिजनेस लोन पाने के दरवाजे खोलता है. खराब क्रेडिट स्कोर से उनके विकल्प सीमित हो जाते हैं. एक कारोबारी समय पर अपने सारे कर्ज चुकाकर बेहतर क्रेडिट स्कोर बना सकता है.

लोन की राशि

एक कारोबारी को लोन की राशि के संबंध में समझदारी से फैसला लेना चाहिए. ऐसे मामलों में लोग जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने के बारे में सोचते हैं क्योंकि जितना ज्यादा फंड मिलेगा, उतनी ही आसानी से बिजनेस चलेगा. लेकिन ध्यान रखें कि इससे अतिरिक्त कर्ज भी आपके सिर पर आ जाता है. कारोबार मालिक के पास एक बिजनेस प्लान होना चाहिए, जिसमें शुरुआती पूंजी की जरूरत और कितना पैसा चाहिए की जानकारी हो. अगर आप कर्ज देने वाले को कोई खास कारण नहीं बताएंगे तो वे लोन देने में आना-कानी कर सकते हैं. इसी तरह, अगर कारण अच्छा नहीं लगा और कुछ ऐसा है जिसका भार बिजनेस नहीं उठा सकता तो फिर से कर्ज देने वाले को शक होगा.

बिजनेस लोन लेने के कई कारण हो सकते हैं जैसे मशीनरी लगाना, रेंट, पेरोल, शुरुआती फीस और इन्वेंट्री इत्यादि. एक कारोबारी को कभी भी जरूरत से ज्यादा कर्ज नहीं लेना चाहिए क्योंकि आखिर में यह कर्ज ही है.

सही दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन अप्लाई करें:

बैंक, वित्तीय संस्थान और अन्य लोन एजेंसियां छोटे एवं मध्यम उद्योगों को काफी सपोर्ट करती हैं. झंझट से बचने के लिए, सभी बिजनेस मालिकों को कुछ बुनियादी दस्तावेज जरूर जमा कराने चाहिए. हर लोन एजेंसी की अपनी गाइडलाइंस हैं. इसलिए हर संस्थान की दस्तावेजों की मांग अलग अलग हो सकती है. लेकिन आम तौर पर इस लिस्ट में इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट, पिछले 3 वर्षों का ऑडिट किया हुआ फाइनेंशियल स्टेटमेंट, शेयरहोल्डर्स की लिस्ट, डायरेक्टरों और पार्टनर्स की जानकारी, पिछले 3 वर्षों का आईटी रिटर्न या वेल्थ टैक्स का मूल्यांकन, पिछले 3 साल का सेल्स टैक्स रिटर्न्स या मूल्यांकन, पार्टनर्स और डायरेक्टरों का आईडी प्रूफ, गारंटरों, डायरेक्टरों और पार्टनर्स के पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, पार्टनर्स और डायरेक्टरों के रिज्यूम और नेटवर्थ, जिस जगह पर बिजनेस है, उसके दस्तावेज, परिसर के कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सरकार का आदेश, जमीन का साइट मैप, बिल्डिंग प्लान का ब्लू प्रिंट, बिल्डिंग को लेकर आर्किटेक्ट का अनुमान, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के मामले में संयंत्र और मशीनरी के लिए सप्लायर्स की ओर से दिया गया अनुमानित बजट, मार्केटिंग प्लान, किसी भी वर्तमान लोन सुविधाओं के मामले में स्वीकृति पत्र की कॉपी, एसएसआई रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, पल्यूशन डिपार्टमेंट की एनओसी, बिजली की मंजूरी और लगाए जाने का सबूत, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मैनेजर्स और टेक्निकल स्टाफ की एंप्लाई लिस्ट, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस  का फ्लो चार्ट, कोलेटरल सिक्योरिटीज लीज या सेल्स डीड, संपत्तियों की विस्तृत जानकारी और किसी तरह का सहयोग समझौता शामिल होता है.

अगर पहली बार बिजनेस लोन ले रहे हैं तो बिजनेस प्लान पेपरवर्क का एक अहम हिस्सा होता है. बिजनेस प्लान कर्ज देने वाली संस्था को यह समझने में मदद करता है कि व्यापार लोन पाने को तैयार है. यह लक्ष्य हासिल करने और लोन चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. बिजनेस प्लान में कंपनी की प्रोफाइल, बिजनेस का प्रकार, टारगेट ऑडियंस, विभिन्न खर्चे, प्रतिद्वंदियों की समीक्षा, अगले 5 साल में अनुमानित ग्रोथ और रणनीति शामिल होनी चाहिए.

एक छोटा व्यापार ऋण किसी कारोबारी की पैसों के इस्तेमाल की क्षमता को समझने का सबसे सही रास्ता है. अगर इसका सही उपयोग किया गया तो बिजनेस और बड़ा और स्थापित हो जाएगा. कारोबारियों को समय पर लोन चुकाना चाहिए, उसकी गाइडलाइंस से जुड़े रहें और लोन के मकसद वही रहे ताकि आप लक्ष्य से भटक ना जाएं. अगर कर्जदाता ने पाया कि आप प्रक्रिया का सही तरह से पालन कर रहे हैं तो वह आपको कम दरों पर आगे भी लोन मुहैया कराएगा.

Leave a Comment