भारत में महिलाओं के लिए होम लोन के सबसे बड़े फायदे

भारत के विभिन्न राज्यों में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए महिला प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए कई अतिरिक्त फायदे दिए गए हैं. पहले महिलाओं के लिए कोई भी वित्तीय निर्णय लेना असामान्य था, क्योंकि वित्तीय निर्णय अकसर परिवार के पुरुष ही लेते थे. लेकिन अब समय बहुत बदल गया है और समाज में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक स्टेटस भी. जब बात घर खरीदने की आती है तो महिलाएं अब वित्तीय तौर पर सशक्त हैं और वे अपनी पसंद खुद चुन सकती हैं. रियल एस्टेट सेक्टर ऐसा सेक्टर है, जहां महिलाओं को अब भी मर्दों के बराबर आना है.

इसलिए, इसे बदलने और खुद के लिए संपत्ति बनाने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए, सरकार महिला घर खरीदारों को अतिरिक्त लाभ दे रही है.

आइए आपको बताते हैं कि भारत में महिलाओं को होम लोन में क्या फायदे दिए जाते हैं?

कम ब्याज दर

एक सही होम लोन किफायती साबित हो सकता है, जहां एक गलत विकल्प आपके फाइनेंस को खत्म कर सकता है.

कम ब्याज दर वाले होम लोन उत्पाद को खोजते वक्त आप इस तथ्य को नहीं छोड़ सकते कि भारतीय महिलाओं को होम लोन लेते समय ब्याज दर पर रियायत मिलती है.

रियायत 0.05% और 0.1% के बीच हो सकती है. आप शायद ये सोचें कि यह बहुत बड़ी रियायत नहीं है और आपको इसे क्यों चुनना चाहिए, लेकिन जब आप कैलकुलेशन करते हैं तो पूरी अवधि के लिए यह छोटा अंतर बहुत बड़ा साबित हो सकता है. वो इसलिए क्योंकि होम लोन की अवधि 15 से 30 साल तक खिंच सकती है.

उदाहरण के लिए, महिलाओं के लिए एसबीआई की ब्याज दरें 8.7 से 9.25 के बीच है वहीं अन्य के लिए एसबीआई की होम लोन ब्याज दरें 8.20-9.35 प्रतिशत है.

कम स्टैंप ड्यूटी

स्टैंप ड्यूटी भी एक अन्य लागत होती है, जो प्रॉपर्टी की कॉस्ट के साथ जुड़ी होती है. यह एक टैक्स होता है, जो राज्य सरकारें प्रॉपर्टी की बिक्री या ट्रांसफर पर लगाती हैं. महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और महिलाओं के मालिकाना हक वाले मकान बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्य उन संपत्तियों पर स्टैंप ड्यूटी में छूट देते हैं, जो महिलाओं के नाम पर होते हैं. यह रियायत 1 से दो प्रतिशत तक होती है. यह हर राज्य पर निर्भर करता है. इससे भी आपकी काफी बचत होती है. उदाहरण के लिए, एक घर 1 करोड़ रुपये का है तो सेविंग्स 1 से लाख रुपये तक की हो सकती है.

झारखंड उन राज्यों की सूची में नंबर एक पर है, जहां पुरुषों के लिए स्टैंप ड्यूटी चार्ज 7 प्रतिशत और महिलाओं के लिए केवल एक प्रतिशत है. जबकि अन्य राज्य भी मानक कमी की पेशकश करते हैं.

टैक्स छूट

खुद के कब्जे वाले घर को महिलाओं के नाम पर खरीदने पर आपको प्रिंसिपल अमाउंट में 1.5 लाख रुपये और हर वित्त वर्ष में ब्याज भुगतान की राशि पर 2 लाख की छूट मिलती है.

अगर घर पति-पत्नी दोनों के नाम पर है तो दोनों ही अलग-अलग आयकर नियमों के तहत टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं. यहां टैक्स छूट संपत्ति के स्वामित्व वाले हिस्से पर भी निर्भर करेगा क्योंकि सह-मालिक और सह-उधारकर्ता दोनों ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.

यह अच्छा आइडिया है कि आप पत्नी के नाम पर घर लें और उन्हें सह-मालिक बना दें. हालांकि, महिला होम लोन खरीदारों को दी जाने वाली टैक्स छूट का फायदा तभी उठाया जा सकता है जब उसके पास आय का एक अलग स्रोत हो. इसके अलावा, जॉइंट होम लोन अप्लाई करने से आपको ज्यादा फायदे मिलते हैं और आपकी एलिजिबिलिटी बढ़ती है.

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