स्टेप अप होम लोन से पेशेवर युवा ऐसे खरीद सकते हैं अपना ड्रीम होम

कम उम्र में खुद का घर खरीदना एक बड़ी कामयाबी है और इन दिनों यंग प्रोफेशनल्स ऐसा करने में कामयाब भी हो रहे हैं. लेकिन हमारे देश की ज्यादातर आबादी, जिन्होंने अभी कमाना शुरू किया है, वे इसके बारे में सोचते तक नहीं हैं. लेकिन यह वही है जो अनजाने में उन्हें वापस खींच रहा है. फाइनेंशियल एडवाइजर्स भी करियर की शुरुआत में ही घर खरीदने का सलाह देते हैं. उनके मुताबिक यही सबसे सही समय होता है. जब आप युवा होते हैं और कमाने लगते हैं तो आप पर कोई जिम्मेदारी नहीं होती. इसलिए यह निवेश करने और खुद को वित्तीय तौर पर मजबूत बनाने का सर्वश्रेष्ठ समय है.

लेकिन ज्यादातर युवा प्रोफेशनल्स इन वित्तीय झमेलों में पड़ने के बजाय आजकल मौज में रहना ज्यादा पसंद करते हैं. घर खरीदने जैसी बड़ी इन्वेस्टमेंट के बारे में न सोचने का उनका एक बड़ा कारण यह है कि वे सोचते हैं कि ‘वे कम कमाते हैं और घर खरीदना अफोर्ड नहीं कर पाएंगे’ और वे फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट को मैनेज करने के बजाय मौज-मस्ती में लग जाते हैं. यह युवा कामगारों की आम सोच है कि पहले हम अच्छा कमाने लग जाएं उसके बाद अपनी फाइनेंशियल लाइफ शुरू करेंगे. यहां वे एक बात भूल जाते हैं कि आपके अनुभव और उम्र के आधार पर ही आपकी सैलरी बढ़ेगी और वक्त के साथ जिम्मेदारियां भी आएंगी. लेकिन अब युवाओं के लिए अपना ड्रीम होम खरीदना मुमकिन है. ऐसा वे स्टेप अप होम लोन के जरिए कर सकते हैं.

क्या होता है स्टेप अप होम लोन?

स्टेप अप होम लोन वह ऋण है, जिसमें एक शख्स लोन भुगतान के शुरुआती वर्षों में कम ईएमआई चुकाता है. जैसे-जैसे अवधि बढ़ती है, ईएमआई भी बढ़ती चली जाती है. यह ऐसा लोन विकल्प है, जिसमें कर्जदाता को यह भरोसा होता है कि आने वाले वर्षों में ग्राहक की सालाना आय बढ़ेगी. इसलिए कर्जदाता ग्राहक को रीपेमेंट शेड्यूल देता है, जो ग्राहक की बढ़ती आय से जुड़ा होता है. ऐसे में शुरुआती वर्षों में ग्राहक कम ईएमआई चुकाता है और अवधि और आय बढ़ने बाद उसमें इजाफा करा लेता है.

ईएमआई का कम बोझ

शुरुआती वर्षों में ईएमआई का कम बोझ उनके लिए सही है, जिन्होंने अभी-अभी अपना करियर शुरू किया है.

योग्यता में इजाफा

जब आप स्टेप अप लोन चुनते हैं तो आपकी लोन एलिजिबिलिटी भी बढ़ जाती है. स्टेप अप लोन्स सिर्फ नौकरीपेशा लोगों को ही मिलते हैं, जो अपने करियर में स्थिर होते हैं, नौकरी अच्छी होती है और भविष्य में सैलरी बढ़ने के चांस होते हैं. इन पैमानों के आधार पर ग्राहक की लोन एलिजिबिलिटी बढ़ जाती है.

मिलते हैं ज्यादा टैक्स फायदे

चूंकि शुरुआती किस्तों का अधिकांश हिस्सा ब्याज में चला जाता है, इसलिए टैक्स का फायदा ग्राहक लंबी अवधि के लिए भी ले सकता है.

ब्याज पर बचत

टैक्स में फायदों के साथ-साथ उधार की लागत कम हो जाती है. सेविंग्स को आप कहीं इन्वेस्ट कर सकते हैं ताकि ज्यादा रिटर्न्स मिलें.

स्टेप-अप होम लोन के फायदे

1. स्टेप-अप होम लोन ग्राहक की भविष्य की कमाई क्षमता के आधार पर लोन एलिजिबिलिटी को 5% – 30% तक बढ़ाता है.

2. स्टेप-अप होम लोन के शुरुआती वर्षों में, ईएमआई कम होती है और अवधि के साथ इसमें भी इजाफा होता है क्योंकि वक्त के साथ सैलरी का      अनुपात भी बढ़ेगा.

3. बैंक स्टेप अप लोन अप्रूव नहीं करते क्योंकि इसमें काफी जोखिम होता है. करियर अच्छा हो सकता है तो बुरा वक्त भी आ सकता है. भविष्य में       ग्राहक की नौकरी भी जा सकती है, जो कर्जदाता के लिए काफी रिस्की हो जाएगा.

4. चूंकि स्टेप अप होम लोन में काफी रिस्क होता है इसलिए बैंक बिजनेसमैन को ये लोन नहीं देते.

5. बैंक स्टेप अप होम लोन निर्धारित ब्याज दर पर देते हैं.

स्टेप अप होम लोन की सीमाएं

स्टेप अप होम लोन की शुरुआत में ईएमआई का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई में ही शामिल होता है. नतीजन, बकाया मूल राशि धीमी गति से घटती है. अगर कोई फ्लोटिंग ब्याज दर चुनता है तो उन्हें निश्चित ब्याज दर की तुलना में ज्यादा ब्याज चुकाना होगा.

और आखिर में

स्टेप अप होम लोन चुनते वक्त संवेदनशील बनें. भविष्य के लिए ईएमआई के लिए वेतन वृद्धि का प्रतिशत बहुत सावधानी से चुनें. सामान्य रूप से और अपनी अपेक्षित तनख्वाह में इजाफे के अनुसार 2-3 प्रतिशत की मुद्रास्फीति का इस्तेमाल करने की कोशिश करें. फ्लोटिंग रेट ऑप्शन के बजाय एक निश्चित ब्याज दर विकल्प को चुनें. जितना जरूरी हो उतना उधार लें ताकि आप आसानी से चुका सकें.

याद रखें कि कम सैलरी वाले लोग स्टेप-अप होम लोन के जरिए ज्यादा लागत वाली प्रॉपर्टीज भी खरीद सकते हैं. ग्राहक के भविष्य के वेतन और नौकरी की सिक्योरिटी के अनुमान इस लोन के अहम बिंदु हैं.

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