कैसे कमर्शियल लोन छोटे बिजनेस को व्यापार से जुड़े खर्चे पूरे करने में मदद करते हैं

बिजनेस के अप्रत्याशित संचालन खर्चे और पूंजी खर्च को पूरा करने के लिए कंपनियां छोटी अवधि के लिए कमर्शियल लोन लेती हैं. बिजनेस के शुरुआती चरण में ऐसे कई अवसर आते हैं, जब आपको इनऑर्गेनिक ग्रोथ के मौके मिलते हैं. लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए आपको काफी पूंजी की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा तेजी से बढ़ते बिजनेस में कई खर्चे होते हैं. इन सभी स्थितियों में कमर्शियल लोन आपके बिजनेस को सपोर्ट करने में काफी मददगार साबित हो सकता है.

कमर्शियल लोन्स का इस्तेमाल: पिछले कुछ वर्षों में कमर्शियल लोन्स ने खुद को छोटी अवधि की वित्तीय जरूरत से पे-रोल मैनेजिंग और छोटी आपूर्ति खरीदने में तब्दील कर लिया है. किसी एक सीजन में भारी बिक्री, पसंदीदा त्योहारों या ग्राहकों के व्यवहार के बदलते पैटर्न की परवाह किए बिना, किसी बिजनेस के सभी खर्चों को पूरा करने के लिए कमर्शियल लोन हमेशा व्यापार की सारी जरूरतों को पूरा करते हैं.

कमर्शियल लोन्स किसी निश्चित अवधि में चुकाए जा सकते हैं या फिर ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक ग्राहक अवधि चुन सकता है. इसके लिए किसी चीज को बतौर गारंटी नहीं रखना पड़ता और पुनर्भुगतान के विकल्पों में भी लचीलापन है. हालांकि, लोन डिफॉल्ट और अपने क्रेडिट स्कोर को नुकसान से बचाने के लिए ग्राहक को लोन राशि ब्याज के साथ  तय अवधि में ही चुकानी पड़ती है.

कमर्शियल लोन के लिए अप्लाई करने की योग्यता

कमर्शियल लोन के लिए आवेदन करने वाली इकाई एक साझेदारी फर्म, एक स्वामित्व, एक निजी लिमिटेड कंपनी, एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी या कोई अन्य वैध इकाई हो सकती है. कमर्शियल लोन्स को बैंक या अन्य कर्ज देने वाले संस्थान मुहैया कराते हैं. लोन लेने की वजह बताने के बाद कर्ज देने वाला संस्थान उसका मूल्यांकन करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई डॉक्टर क्लिनिक के लिए लोन अप्लाई करता है तो बैंक उसके परिसर का दौरा कर सकता है. लोन हासिल करने के लिए, बैंक में कंपनी या इकाई के नाम पर बैंक में करंट अकाउंट होना चाहिए, जिसका एक्टिवेट होना भी जरूरी है.

बैलेंस शीट व प्रॉफिट और लॉस अकाउंट के अलावा बैंक उधार लेने वाली कंपनी की कैश फ्लो स्टेटमेंट भी देखती है. इसकी न्यूनतम टर्नओवर की जरूरतें होती हैं, जिन्हें ग्राहक को पूरा करना पड़ता है. यह हर कर्जदाता और बिजनेस के प्रकार के लिए अलग-अलग होता है, जिसके लिए लोन की जरूरत होती है. कंपनी मुनाफे में होनी चाहिए और उससे उम्मीद होगी कि वह एक निश्चित समयावधि में मुनाफा कमाए या फिर लोन पुनर्भुगतान के लिए उसके पास कैश फ्लो हो.

उधार लेने वाली कंपनी एक निश्चित समय के लिए संचालन में हो, जिसकी उधार देने वाली संस्था ने शर्त रखी हो. क्रेडिट अप्रेजल प्रोसेस के लिए ट्रैक रिकॉर्ड बेहद जरूरी है. नए बिजनेस अगले 5 साल या उससे ज्यादा में अपनी आय का अनुमान देते हैं.

किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है

कमर्शियल लोन्स के लिए हर कर्जदाता की दस्तावेजों की मांग अलग-अलग होती है. हालांकि कुछ ऐसे दस्तावेज होते हैं, जो हर संस्थान में आम रहते हैं, जो हैं:
– कंपनी और उसके डायरेक्टर्स के पैन कार्ड
– हालिया जीएसटी रिटर्न्स, अगर बिजनेस जीएसटी आय की सीमा के तहत आती है
– सालाना स्टेटमेंट, जिसमें बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट व कैश फ्लो स्टेटमेंट शामिल होती है.
– पिछले 6 महीने या उससे ज्यादा की बैंक स्टेटमेंट
– बिजनेस ऑपरेशन्स का प्रूफ, जैसे ट्रेड लाइसेंस
– कंपनी और डायरेक्टर्स के इनकम टैक्स रिटर्न्स
– स्थानीय प्रशासन के पास कंपनी के रजिस्ट्रेशन पेपर्स की कॉपी
– उधार से संबंधित बोर्ड का प्रस्ताव
– असोसिएशन ऑफ द कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ आर्टिकल्स
– कंपनी के फिक्स्ड असेट्स के इंश्योरेंस

ब्याज दरें

लोन सीमांत लागत-आधारित उधार दर के आधार पर दिए जाते हैं, जो अर्थव्यवस्था दर के आधार पर समय-समय पर बदले जाते हैं. कर्जदाता द्वारा जोखिम की समीक्षा के आधार पर ब्याज दरें और अन्य नियम भिन्न हो सकते हैं. लोन अग्रीमेंट में लोन प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्जेज, लेट पेमेंट फीस और अन्य शुल्क का भी जिक्र होता है.

कमर्शियल लोन की ब्याज दर विभिन्न पैमानों पर आधारित होती है, जिसमें कर्ज देने वाला संस्थान, दी गई सुरक्षा, कंपनी का टर्नओवर, प्रॉफिट, कैश फ्लो, ग्राहक की पैसों को लेकर विश्वसनीयता इत्यादि शामिल होता है.

कमर्शियल लोन्स के क्या फायदे हैं

बिजनेस का विस्तार: जिन छोटे उद्योगों का बिजनेस मॉडल, अच्छी लेनदेन की हिस्ट्री के साथ पहले से स्थापित होता है, वे बिजनेस के विस्तार के अगले चरण के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं. चाहे यह नई जगह पर विस्तार करना हो या फिर नए ग्राहकों तक पहुंचना, ये लोन उनके संचालन को और आसान बनाएंगे.

नई टेक्नोलॉजी और उपकरण: जो बिजनेस अपने लिए नए उपकरण या मशीन खरीदने की सोच रहे हैं, वे इक्विपमेंट लोन ले सकते हैं. बैंक नई और महंगी मशीनें खरीदने के लिए कमर्शियल लोन देते हैं ताकि व्यापार की मदद हो और उनकी इस प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रोडक्टिविटी बढ़े.

मैनेजिंग इन्वेंट्री: जब बात बड़े बिजनेस ऑर्डर लेने की होती है खासकर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का, तो कंपनियों को आसानी से इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की जरूरत होती है. कमर्शियल लोन्स ऐसी स्थितियों में फायदेमंद साबित होते हैं और वे सही वक्त पर इन्वेंट्री हासिल करने में मदद करता है.

वर्किंग कैपिटल जुटाना: मार्केट में जमे रहने के लिए कैश और खर्च की रोजाना की जरूरत को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल को बरकरार रखना जरूरी होता है. कमर्शियल लोन रोजमर्रा के संचालन के लिए कैश और अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने में एक सटीक संतुलन बनाता है.

कैसे चुनें सही कमर्शियल लोन?

कई बिजनेस ऐसा मानते हैं कि छोटा बिजनेस लोन लेना सबसे सही विकल्प है क्योंकि उसे वापस चुका देना आसान है. भले ही टर्म लोन्स कम लागत वाले होते हैं, इसलिए छोटे बिजनेस के लिए उन्हें चुनना मुश्किल होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोन्स को अप्लाई करने प्रक्रिया में काफी लंबा वक्त लगता है. लिहाजा, तय करें कि आपको कितनी राशि चाहिए. यह निर्भर करेगी कि आपको बिजनेस में कितना वक्त हो गया है, सालाना टर्नओवर क्या है, रोजमर्रा की संचालन लागत और अन्य अप्रत्याशित खर्चे क्या हैं.

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