छोटे एवं मध्यम उद्योग के लिए बिजनेस लोन कम ब्याज दरों पर कैसे पाएं?

छोटे एवं मध्यम उद्योग (SME) के लिए बिजनेस लोन खासतौर पर भारत में डिजाइन किए गए हैं, ताकि उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके. छोटे एवं मध्यम उद्योग व लघु, छोटे व मध्यम उद्योग भारत में विभिन्न कर्जदाता मुहैया कराते हैं. छोटे व मध्यम उद्योग लोन सुरक्षित या असुरक्षित हो सकते हैं. सुरक्षित छोटे व मध्यम उद्योग लोन के लिए गारंटी देनी पड़ती है. जबकि असुरक्षित छोटे व मध्यम उद्योग बिजनेस लोन वह लोन होता है, जो बिना किसी सिक्योरिटी के दिया जाता है.

आप भारत में विभिन्न प्रकार के SME लोन हासिल कर सकते हैं, जिसमें मशीनरी लोन, वर्किंग कैपिटल लोन, टर्म लोन, फ्लेक्सी लोन और कैपिटल लोन शामिल हैं. हर कर्जदाता के योग्यता के अपने पैमाने होते हैं. साथ ही दस्तावेजों की जरूरत और ब्याज दर भी अलग होती है.

योग्यता और दस्तावेज हर ग्राहक के लिए समान रहते हैं लेकिन ब्याज दरों की पेशकश हर उधारकर्ता के लिए कुछ कारकों के तहत अलग हो सकती है.

हर कारोबारी सबसे कम ब्याज दरों पर भारत में सुरक्षित और असुरक्षित बिजनेस लोन चाहता है. आइए आपको कुछ फैक्टर्स बताते हैं, जिनकी मदद से आप भारत में कम ब्याज दरों पर SME बिजनेस लोन पा सकते हैं.

CIBIL स्कोर

CIBIL स्कोर किसी शख्स के वित्तीय व्यवहार का एक संख्यात्मक प्रतिनिधित्व होता है. यह 300 से 900 के बीच हो सकता है. जितना ज्यादा CIBIL स्कोर होगा, उतना ही ग्राहक विश्वसनीय माना जाएगा. कर्जदाता भी उन्हीं ग्राहकों को एसएमई लोन देते हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर ज्यादा होता है.

इसलिए भारत में कर्जदाताओं के लिए ज्यादा CIBIL स्कोर जोखिम को कम कर देता है. लिहाजा एसएमई बिजनेस लोन देने वाले कर्जदाता ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले को कम ब्याज दरों पर लोन मुहैया कराते हैं. कम ब्याज दरों पर लोन हासिल करने के लिए आपको अपने क्रेडिट स्कोर को सुधारने का काम शुरू कर देना चाहिए.

मौजूदा कर्ज

आपने अपने पिछले कर्ज चुकाए या नहीं, ये भी भारत में हर बिजनेस लोन देने वाला कर्जदाता जरूर देखता है. साथ ही कितनी जल्दी आपने बिजनेस लोन के लिए अप्लाई किया. इसे कर्ज से आय का अनुपात कहा गया है. अगर आपका कर्ज से आय का अनुपात ज्यादा है तो यह दिखाएगा कि आप लोन पर ही जीवन जी रहे हैं और आपने नाम पर कई कर्ज चल रहे हैं, जो आपकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करते हैं.

कर्ज-से-आय अनुपात की कैलकुलेशन आपकी मासिक पूर्व-कर आय से मासिक लोन के टोटल को डिवाइड करके की जाती है. इसके अतिरिक्त, अगर कर्ज से आय का अनुपात ज्यादा है तो मतलब है कि आपकी सैलरी छोटे बिजनेस लोन की ईएमआई चुकाने में खर्च हो रही है. आखिर में सवाल खड़ा हो जाता है कि आप SME बिजनेस लोन कैसे चुकाएंगे.

विभिन्न कर्जदात

हर कर्जदाता के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया अलग होते हैं और दस्तावेजों की मांग भी. चूंकि हर कर्जदाता की ही अलग एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया है इसलिए उनकी ब्याज दरें भी अलग होती हैं. फाइनेंस कंपनियों के नियम व ब्याज दरें चेक करना जरूरी है. इसलिए जरूरी है कि आप ऐसे एसएमई बिजनेस लोन कर्जदाता को सर्च करें, जिसकी ब्याज दरें कम से कम हों.

साथ ही ऐसा कर्जदाता भी देखें, जिसकी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और दस्तावेजों की मांग कम हो. कर्जदाता चुनते वक्त आपको ऑनलाइन लोन एप्लिकेशन और फास्ट प्रोसेसिंग, ये दो चीजें जरूर देखनी चाहिए. इसके अलावा कर्ज की राशि आपके अकाउंट में भेजने पर कर्जदाता कितना वक्त लेगा, यह भी जरूर देख लें.

लोन की शर्तें

बिजनेस लोन की ब्याज दरों पर प्रभाव डालने वाला एक और फैक्टर होता है लोन टर्म. जितनी ज्यादा एसएमई बिजनेस लोन की अवधि होगी, उतना ज्यादा ब्याज लगेगा. लेकिन ध्यान रहे कि शॉर्ट लोन की पुनर्भुगतान अवधि से आपको ज्यादा ईएमआई चुकानी पड़ेगी. इसलिए अपनी लोन की भुगतान अवधि सोच-समझकर चुनें.

मोलभाव

बिजनेस लोन के लिए ब्याज दरों में मोलभाव बेहद जरूरी है. आप कम ब्याज दरों के लिए बिजनेस फाइनेंसिंग कंपनियों से मोलभाव कर सकते हैं. लेकिन जैसे कि पहले भी कहा गया है कि ऐसा आप तभी कर पाएंगे, जब क्रेडिट स्कोर अच्छा होगा.  750 से ज्यादा का CIBIL स्कोर सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

फाइनेंशियल सेक्टर में टेक्नोलॉजी आने से आप SME और MSME लोन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. लेकिन एसएमई बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करने से पहले आपको बिजनेस लोन की एलिजिबिलिटी जरूर चेक कर लेनी चाहिए. साथ ही बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करने से पहले यह भी देख लें कि कितनी राशि की आपको जरूरत है. जरूरत से ज्यादा की राशि लेने पर आपको अतिरिक्त ब्याज देना होगा.

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