होम लोन फ्लैट इंट्रस्ट रेट के जाल से कैसे बचें

क्रेडिट्स के साथ रहना अब आम बात हो गई है. हर शख्स पर किसी न किसी चीज का कर्ज है. चाहे वो होम लोन हो, गाड़ी का लोन हो, पर्सनल लोन हो, एजुकेशन लोन हो, गोल्ड लोन हो या फिर प्रॉपर्टी के एवज में लोन. असल में लोन लेना अब आसान हो गया है और यह कुछ ही घंटों में हासिल हो जाता है. ऑनलाइन कर्जदाताओं ने लोन प्रोसेसिंग को इतना आसान बना दिया है कि उसके सभी पहलुओं को समझे बिना ही हम लोन के लिए अप्लाई कर देते हैं. लोन एजेंट्स या बैंक कर्मचारी कभी भी आपको लोन के नकारात्मक पहलू नहीं बताते. इसके अलावा शर्तों की विस्तृत जानकारी भी नहीं देते. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि लोन के बड़े मकड़जाल से आप कैसे बच सकते हैं.

ये बात तो सभी ग्राहक जानते हैं कि जो राशि हम बतौर लोन बैंक से लेते हैं, उसे एक निश्चित ब्याज के साथ बैंक को वापस लौटाते हैं. आज हम आपको ऐसे तरीके बताएंगे, जिससे कर्ज लेने वाला लोन पर ब्याज की कैलकुलेशन कर सकता है. कई बार, कर्जदाता ग्राहकों को उन प्रक्रियाओं के बारे में नहीं बताते, जिससे वे फायदा उठा सकें. आइए आपको बताते हैं कि कर्जदाताओं के जाल से आप खुद को कैसे बचा सकते हैं.

लोन पर ब्याज दो तरीकों से कैलकुलेट किया जा सकता है. पहला होता है Flat Interest Rate और दूसरा होता है Reducing Balance Interest Rate.

क्या होता है Flat Interest Rate?

फ्लैट इंट्रस्ट रेट का मतलब होता है कि लोन पर जो ब्याज लगेगा, वह पूरी अवधि में एक जैसा रहेगा, कभी बदलेगा नहीं. इसका यह भी मतलब है कि अवधि खत्म होने तक पूरी मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) पर ब्याज दर की गणना होगी. ब्याज गणना की इस प्रक्रिया में मूल राशि और ब्याज लोन की आखिरी ईएमआई तक एक समान रहते हैं. हर ईएमआई के साथ, मूल राशि का भुगतान किया जाता है, लेकिन फ्लैट इंट्रस्ट रेट पर ब्याज की कैलुकेशन करते हुए ब्याज की कैलकुलेशन उस मूल राशि पर भी की जाती है जिसका भुगतान किया गया है.

Flat Interest Rate की कैलकुलेशन कैसे करें

प्रति इंस्टॉलमेंट पर चुकाया गया ब्याज = (असली लोन अमाउंट*कितने साल*प्रति वर्ष बयाज दर)/ इंस्टॉलमेंट की संख्या

मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपये का लोन लिया है और फ्लैट रेट ऑफ इंट्रस्ट 10 प्रतिशत है 5 वर्ष के लिए (60 महीने) तो आपको चुकाना होगा:

20000 रुपये (प्रिंसिपल रीपेमेंट @ 100000/5)+10000 (100000 ब्याज@10%)= 30000 रुपये हर साल या फिर 2,500 रुपये हर महीने.

इस तरह आप, 2500 रुपये*60=1,50000 रुपये चुकाएंगे. इसलिए प्रति माह 2500 रुपये का भुगतान आपके लोन पर 17.27% प्रति वर्ष के प्रभावी ब्याज दर में तब्दील हो जाता है.

ऊपर बताई गई कैलकुलेशन से यह पता चलता है कि फ्लैट इंट्रस्ट रेट पर लोन चुनते वक्त, प्रभावी ब्याज दर हमारे लोन अग्रीमेंट के कागजात पर ब्याज दर से 1.7 से 1.9 गुना ज्यादा है.

क्या होता है Reducing Balance Interest Rate?

Reducing Balance Interest Rate को प्रति महीने बकाया लोन राशि पर कैलकुलेट किया जाता है. इस तरह के ब्याज में, ईएमआई में महीने के लिए बकाया लोन राशि के लिए देय ब्याज शामिल होता है. हर ईएमआई के साथ बकाया मूल राशि घट जाती है. इसलिए अगले महीने के लिए देय ब्याज की गणना अवैतनिक (Unpaid) मूल राशि (Principal Amount) पर की जाती है.  Reducing balance interest Rate होम लोन, गिरवी ऋण, प्रॉपर्टी के एवज में लोन, लोन ओवरड्राफ्ट, क्रेडिट कार्ड्स इत्यादि पर की जाती है.

Reducing balance interest Rate को कैलकुलेट करने का फॉर्म्युला

प्रति इंस्टॉलमेंट पर चुकाए जाने वाला ब्याज= हर इंस्टॉलमेंट पर चुकाया गया ब्याज*बाकी बची लोन राशि

आइए इसे पहले वाले उदाहरण से ही समझते हैं. आपने 1 लाख रुपये का लोन 10 प्रतिशत ब्याज तक पर 5 साल के लिए (60 महीने) लिया. Flat Interest Rate loan में एक शख्स को लोन अवधि खत्म होने तक 10 हजार रुपये प्रति माह ब्याज चुकाना पड़ता है. लेकिन Reducing Interest Rate loan में पहले महीने की ईएमआई होगी 10 हजार, दूसरे महीने की होगी 8000 रुपये. वो इसलिए क्योंकि पहली ईएमआई चुकाने के बाद आपका बकाया प्रिंसिपल अमाउंट घटकर 80 हजार रुपये रह जाएगा. इस तरह हर महीने ईएमआई पर ब्याज दर कम होती जाएगी. इस तरह Reduced Interest Rate के लोन से आपको 1.3 लाख रुपये ही चुकाने होंगे, जबकि flat interest rate से आप 1.5 लाख रुपये चुका रहे हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

ऊपर की कैलकुलेशन से आप ये तो समझ ही गए होंगे कि कैसे Flat Interest रेट कुछ और नहीं बल्कि एक जाल है. यह सिर्फ ग्राहकों को लुभाने का एक तरीका है. बैंक ग्राहकों को सिर्फ उसकी खासियतों के बारे में ही बताते हैं. ये मकड़जाल ऐसे होते हैं कि ग्राहक इसमें पूरी लोन अवधि में फंसा रहता है और उसे मालूम चल नहीं चलता कि वह फंसा हुआ है. जब लोगों को पैसों की जरूरत होती है तो उनके पास लोन की शर्तों को समझने का वक्त और सब्र दोनों ही नहीं होते. ऐसे में वे कर्जदाता के इस जाल में फंस जाते हैं.

इसलिए जब भी कोई लोन लेने की बात आए तो आपको समय देकर यह जरूर कैलकुलेट करना चाहिए कि आप कितनी राशि लोन के लिए दे रहे हैं. समझदारी भरे फैसले लेने से आप जाल में नहीं फंसेंगे और पैसा भी बचा पाएंगे.

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