बिजनेस लोन ईएमआई कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें?

व्यापार को अच्छी तरह चलाने के लिए काफी पैसों की जरूरत होती है. बिजनेस के लिए पूंजी जुटाने के यूं तो कई तरीके हैं. इनमें से एक है बिजनेस लोन. चाहे आपका बड़ा बिजनेस हो या छोटा, आपको कई बार महसूस होता होगा कि बिजनेस में और पैसा लगाया जाए ताकि प्रोडक्शन यूनिट्स बढ़ाई जा सकें. इसके लिए आप एनबीएफसी या बैंकों से बिजनेस लोन ले सकते हैं. जो लोन आप लेंगे, उसे या तो आप बिजनेस पर खर्च कर सकते हैं या उससे जुड़ी गतिविधियों पर.

कर्ज देने वाली कई संस्थाएं हैं. कुछ भी फाइनल करने से पहले आपको लोन प्रॉडक्ट को लेकर अच्छे से रिसर्च करनी चाहिए. चूंकि कर्ज लिया हुआ पैसा लौटाना भी पड़ेगा, इसलिए यह भी बिजनेस के मासिक खर्च में शामिल होगा.

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क्षमतावान ग्राहकों की बिजनेस लोन को लेकर फैसले लेने में मदद के लिए कर्जदाता बिजनेस लोन ईएमआई कैलकुलेटर भी मुहैया कराते हैं. इससे पहले कि हम इस विषय की गहराई में जाएं, आइए आपको बताते हैं कि बिजनेस लोन ईएमआई होती क्या है.

क्या होती है बिजनेस लोन ईएमआई?

समान मासिक किस्त या ईएमआई. जो आप लोन लेते हैं, उसे हर महीने एक निश्चित राशि में आप बैंक या कर्ज देने वाले को लौटाते हैं. इसके दो हिस्से होते हैं. पहला लोन की मूल राशि और दूसरा उस पर लगने वाला ब्याज. लोन की राशि पर पूरी अवधि में ब्याज लगता है. यह राशि तय होती है और हर महीने चुकानी होती है. ईएमआई मूल राशि, ब्याज दर और लोन की अवधि के जरिए कैलकुलेट की जाती है.

क्या होता है बिजनेस लोन ईएमआई कैलकुलेटर

बिजनेस लोन ईएमआई कैलकुलेटर वह कैलकुलेटर होता है, जो बताता है कि आप व्यापार के लिए कितनी राशि बतौर ऋण ले सकते हैं. यह आपके मासिक खर्च पर भी भारी नहीं पड़ेगा. यह बताता है कि कितनी राशि आपको हर महीने कर्जदाता को वापस चुकानी होगी.

उदाहरण के तौर पर मान लेते हैं कि आपने 3 लाख रुपये का बिजनेस लोन 2 साल की अवधि के लिए 25 प्रतिशत की ब्याज दर पर लिया. लिहाजा आपको जो लोन चुकाना पड़ेगा, वो होगा 3, 84, 275 रुपये. अब ईएमआई की कैलकुलेशन कुछ इस प्रकार होगी.

ईएमआई = [पी X आर X (1+आर) ^ एन] / [ (1+आर) ^ (एन-1)],

यहां

पी का मतलब है प्रिंसिपल अमाउंट यानी मूल राशि

आर- ब्याज दर

एन- बिजनेस लोन की अवधि

ईएमआई कैलकुलेटर ऊपर बताए गए फॉर्म्युले पर काम करता है. कम ब्याज दर के मामले में,
ब्याज की गणना हर महीने कम हुई मूल राशि पर की जाती है.

लोन ईएमआई कैलकुलेटर के फायदे

आसानी से पता चलती है ईएमआई: वो दिन गए जब आपको पेन और पेपर लेकर लोन अकाउंट की ईएमआई कैलकुलेट करनी पड़ती थी. ईएमआई कैलकुलेटर के जरिए, सिर्फ कुछ जानकारियां भरकर एंटर दबाएं. बाकी का काम ईएमआई बिजनेस कैलकुलेटर कर देगा.

विजुअलाइजेशन बेनिफिट: भारत में ज्यादातर ईएमआई कैलकुलेटर पेमेंट्स को विजुअल फॉर्मेट में दिखाते हैं. इसमें आपको टेबल फॉर्मेट में लोन की अवधि (मासिक), ओपनिंग बैलेंस, ईएमआई अमाउंट, भुगतान की गई मूल राशि और बकाया राशि दिखाई देती है. कागज पर लिखे हुए की तुलना में विजुअल फॉर्मेट में चीजों को समझना आसान होता है.

फाइनेंशियल प्लानिंग: बिजनेस जोखिमों से भरा है. यह कोई नहीं जानता कि कब क्या हो जाए. वित्तीय फैसले लेने मुश्किल होते हैं क्योंकि इसमें बड़ी पूंजी शामिल होती है.  चूंकि ईएमआई हर महीने चुकानी होती है इसलिए वित्तीय फैसले लेते वक्त आप प्लानिंग कर सकते हैं.

लोन ईएमआई पर क्या असर डालता है?

ईएमआई अमाउंट कैलकुलेट करने के बाद, अगर आपको लगता है कि ईएमआई राशि ज्यादा है तो आप इसे घटाने के बारे में सोचते हैं. ईएमआई राशि घटाने के लिए आपको समझना पड़ेगा कि कौन से फैक्टर्स ईमआई पर असर डालते हैं. ये हैं:

ब्याज दर: ईएमआई राशि घटाने के लिए ब्याज दर एक अहम कारक है. जैसे ही ऊपर बताया गया है कि ईएमआई में ब्याज दर का अहम योगदान होता है. इस फैक्टर को लेकर कर्जदाताओं में सबसे ज्यादा कॉम्पिटिशन होता है क्योंकि ग्राहक उसी कर्जदाता से लोन लेता है, जिसकी ब्याज दरें सस्ती होती हैं. इसलिए कई बिजनेस लोन ऑफर्स सर्च करें और उनमें से सर्वश्रेष्ठ चुनें.

ध्यान रहे कि जितनी ज्यादा ब्याज दर होगी, उतनी ही ज्यादा ईएमआई चुकानी होगी. वहीं कम ब्याज दर होने पर कम ईएमआई होगी. ध्यान रहे कि ब्याज दर आपकी बिजनेस लोन एलिजिबिलिटी पर निर्भर करेगी.

लोन की अवधि: दूसरा अहम कारक है जो लोन ईएमआई पर असर डालता है, वो है ईएमआई की अवधि. ये वो अवधि होती है, जिसके लिए लोन लिया गया है और जिसमें लोन पूरी तरह चुकाया जाना है. लंबी अवधि का मतलब होता है कि मूल राशि का वक्त बड़ा होता है, जिससे ईएमआई कम हो जाती है. लेकिन यह भी ध्यान रहे कि लंबी अवधि होने से ब्याज की रकम भी बढ़ जाती है.

यह एक गंभीर स्थिति होती है और फैसला ऐसे में सोच-समझकर ही लेना चाहिए. दूसरी ओर, अगर लोन की अवधि कम होती है तो मूल राशि कुछ महीनों की ही होती है और ब्याज दर कम हो जाती है. लेकिन ईएमआई राशि बढ़ जाती है. लिहाजा आपको सारे विकल्प समझकर किसी एक को लेना चाहिए.

लोन की राशि: मूल या लोन की राशि का ईएमआई में बड़ा योगदान होता है. सभी ईएमआई कैलकुलेशन्स का यही आधार होता है. जितना ज्यादा बिजनेस लोन अमाउंट होगा, उतनी ही ज्यादा ईएमआई की राशि होगी. जितना कम लोन अमाउंट होगा, उतनी ही कम ईएमआई राशि होगी. बिजनेस मालिक होने के नाते आपकी विभिन्न जरूरतें होंगी, जिसमें काफी पैसों की जरूरत पड़ेगी.

हालांकि लोन की राशि जरूरत से कम नहीं होनी चाहिए. इसी जगह बिजनेस लोन ईएमआई कैलकुलेटर काम आता है. जितनी राशि आपको चाहिए, वो भरिए, ब्याज दर भरिए और कितने साल के लिए लोन चाहिए वो एंटर कीजिए. ये जानकारियां डालते ही आपको पता चल जाएगा कि लोन के एवज में हर महीने आपको कितनी ईएमआई चुकानी होगी. है ना आसान.

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