क्या लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेना सही फैसला है

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी एक भरोसेमंद और निवेश का फायदेमंद विकल्प होता है क्योंकि यह न सिर्फ प्रोटेक्शन कवर देता है बल्कि पॉलिसी के एवज में लोन लेने पर अतिरिक्त फायदे भी मुहैया कराता है. वित्तीय परेशानियों के वक्त में आप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने पर विचार कर सकते हैं, जिसका आप प्रीमियम भुगतान कर रहे हैं क्योंकि यह लेना आसान और सुरक्षित है. साथ ही, शेयर्स और गोल्ड के एवज में लोन के विपरीत, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की वैल्यू मार्केट में बदलाव के साथ नहीं बदलती.

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने के फायदे:

ज्यादा लोन वैल्यू

आपको इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में अधिकतम कितना लोन मिलेगा, यह आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी पर निर्भर करेगा. हालांकि आमतौर पर सरेंडर वैल्यू (पॉलिसी की वो वैल्यू, जो आपको तब मिलती है, जब आप खुद ही पॉलिसी टर्मिनेंट कर देते हैं) के 80-90 प्रतिशत तक की लोन राशि पॉलिसी होल्डर्स को दी जाती है. उदाहरण के तौर पर, अगर आपका इंश्योरेंस कवर 60 लाख रुपये का है और सरेंडर वैल्यू लोन के अनुरोध के वक्त 30 लाख रुपये है तो आपको 27 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है.

बिना झंझट वाली एप्लिकेशन प्रोसेस

अन्य लोन्स से उलट लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेना आसान है क्योंकि इसमें बहुत कम पेपरवर्क की जरूरत होती है. आमतौर पर पॉलिसी होल्डर्स को लोन 3-5 कामकाजी दिनों में मिल जाता है.

क्रेडिट स्कोर की जरूरत नहीं

अन्य लोन्स के विपरीत, जब आप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेते हैं तो न ही आपका क्रेडिट स्कोर देखा जाता है और न ही कोई सवाल पूछा जाता है. अगर आपकी पॉलिसी इस योग्य है कि उसके एवज में लोन दिया जा सके और अगर अतीत में आपने सारे प्रीमियम वक्त पर भरे हैं तो आपको आसानी से लोन मिल जाएगा. साथ ही अन्य लोन या क्रेडिट कार्ड के कर्ज की तरह पॉलिसी लोन्स आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई नहीं देता और उसे साफ रखता है (भले ही कुछ गलत भी हो जाए)

कम ब्याज दर

अन्य कई लोन्स की तुलना में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर जो ब्याज लगता है, वो कम होता है और यह मुख्यत: आपके द्वारा चुकाए गए प्रीमियम और कितनी बार प्रीमियम चुकाया गया, उस पर निर्भर करता है. जितनी अधिक बार प्रीमियम चुकाया गया है, उतनी ही कम ब्याज दर होगी. आमतौर पर लाइफ इंश्योरेंस के एवज में लोन पर ब्याज 10-12 प्रतिशत तक होता है.

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने के नुकसान

लोन की सीमित उपलब्धता

सभी इंश्योरेंस पॉलिसी में ये सुविधा नहीं होती कि उनके एवज में लोन लिया जा सके. लोन सिर्फ पारंपरिक लाइफ इंश्योरेंस पर ही लिया जा सकता है.

वेटिंग पीरियड

आपमें से कई लोग ये बात नहीं जानते होंगे कि आप इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने के योग्य तब तक नहीं होंगे, जब तक वेटिंग पीरियड खत्म नहीं हो जाता. वेटिंग पीरियड आमतौर पर 3 साल होता है. लोन की राशि मंजूर करने से पहले, कर्जदाता यह चेक करता है कि क्या आपने बिना किसी चूक के सारे प्रीमियम वेटिंग पीरियड के दौरान भरे हैं. अगर सब कुछ सही रहता है तो आपका लोन अप्रूव हो जाता है.

डिफॉल्ट की कोई जगह नहीं

अगर आपने पॉलिसी के एवज में लोन लिया है तो उसे पॉलिसी की अवधि के दौरान ही चुकाना होगा. लोन लेने के बाद, पॉलिसीहोल्डर पॉलिसी के एवज में लोन पर ब्याज और पॉलिसी का प्रीमियम दोनों चुकाएगा. अगर आप भुगतान में चूक करते हैं या फिर भविष्य के प्रीमियम में डिफॉल्ट होता है तो आपकी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेकार हो जाएगी और बीमाकर्ता के पास पॉलिसी के सरेंडर वैल्यू से बकाया वसूलने का अधिकार होगा.

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने की योग्यता क्या है?

– वह शख्स भारत का नागरिक होना चाहिए.
-कम से कम उम्र 18 वर्ष हो.
– आपके पास लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी हो.
– आपकी पॉलिसी सरेंडर वैल्यू के साथ एंडॉमेंट पॉलिसी होनी चाहिए.
– आपने 3 साल का वेटिंग पीरियड पूरा कर लिया हो.

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के एवज में लोन लेने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत है?

– पॉलिसी के ओरिजनल दस्तावेज
– पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट.
– रिहायश का प्रूफ: आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, यूटिलिटी बिल्स.
– आय का प्रमाण: सैलरी स्लिप, बैंक अकाउंट स्टेटमेंट.
– असाइनमेंट की डीड

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी करीबियों को वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराने के लिए ली जाती है. हालांकि अगर आप पॉलिसी के एवज में लोन लेना चाहते हैं तो तभी लें जब कोई और विकल्प न बचा हो और बहुत ज्यादा ही इमरजेंसी हो. यह भी सुनिश्चित कर लें कि आप लोन सिर्फ 6 महीने या 1 साल के लिए ही लें ताकि पॉलिसी के फायदे बरकरार रहें.

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