क्या पर्सनल लोन को समय से पहले चुका देना हमेशा फायदे का सौदा होता है

पूरे भारत में काफी लोग पर्सनल लोन लेते हैं. अन्य ऋणों की तुलना में यह सबसे ज्यादा डिमांड में रहता है. पर्सनल लोन किसी भी मकसद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. यह होम लोन या व्हीकल लोन की तरह नहीं होता, जिसका मकसद और शर्तें एक ही काम के लिए होती हैं. लोग पर्सनल लोन का इस्तेमाल ट्रैवलिंग, फेस्टिवल सेलिब्रेशन्स, गैजेट, घर के सामान लेने और शादी की तैयारियों के लिए करते हैं. अधिकतर लोग यह सोचकर लोन लेते हैं कि वे समय से पहले ही इसे चुका देंगे, वहीं कई इस उधेड़बुन में होते हैं कि क्या इस विकल्प का इस्तेमाल किया जाए या नहीं.

लोन लेते समय कई लोग कम ब्याज दर के साथ लॉन्ग टर्म का विकल्प चुनते हैं, इस तरह मासिक ईएमआई का कम भुगतान करना पड़ता है लेकिन लोन की अवधि बढ़ने से ज्यादा ब्याज दर चुकानी होगी. अगर आपके हाथ में सरप्लस मनी है, तो इस पैसे का इस्तेमाल करें या बकाया पर्सनल लोन को समय से पहले चुकाने के लिए बचत करें. लेकिन पर्सनल लोन को समय से पहले चुकाने के काफी फायदे हैं. कैलकुलेशन की गणना बकाया राशि के आधार पर की जाएगी.

पर्सनल लोन की प्रीपेमेंट के फायदे

लोन की अवधि और लोन की राशि में कमी

भले ही आपने 3 साल के लिए 3 लाख रुपये का लोन लिया हो, तो यह मुमकिन है कि आप कुछ एक्स्ट्रा पैसों के साथ लोन को प्री-क्लोज करा सकते हैं. इस तरीके से आपकी मासिक ईएमआई राशि कम हो जाएगी और लंबी अवधि के लिए लोन जारी रखने की भी जरूरी नहीं होगी. जितनी जल्दी लोन चुकता होगा, उतना ही बोझ कम होगा. अधिकतर पर्सनल लोन्स में एक साल का लॉक इन पीरियड होता है. इसी के बाद ही आप लोन को प्री-क्लोज कर सकते हैं.

लोन की प्री-पेमेंट के लिए इस लॉक पीरियड का इस्तेमाल करें और पर्याप्त कैश जमा कर लें. और साथ ही ईएमआई राशि को कुछ अन्य हाई रिटर्न वाले इन्वेस्टमेंट्स में निवेश करने की योजना बनाएं. अपने पर्सनल लोन के लॉक पीरियड पर विचार करें और इस समय को अपने फाइनेंस को प्लान करने में लगाएं. कोई आदर्श सही या गलत तरीका नहीं है. हर शख्स की आय और कर्ज को वहन करने की क्षमता से ही तय होना चाहिए कि कब लोन को प्री-क्लोज किया जाए.

कोई प्री-पेमेंट चार्जेज नहीं

कर्ज मुक्त होना हमेशा अच्छा होता है. लेकिन ऐसे में यह भी ध्यान रखना उतना ही जरूरी है कि कहीं आप प्री-क्लोजर चार्जेज के तौर पर बहुत ज्यादा राशि तो नहीं चुका रहे. प्री-क्लोज करने या नहीं करने से पहले लोन की अवधि जरूर चेक कर लें. उदाहरण के तौर पर, अगर लोन सिर्फ अगले 6 महीने के लिए या उससे कम है तो उसे प्री-क्लोज न कराएं. अगर लोन फ्लोटिंग रेट ऑफ इंट्रस्ट पर है तो कोई प्री-पेमेंट चार्जेज नहीं लगेंगे. आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक, अगर लोन फ्लोटिंग रेट ऑफ इंट्रस्ट पर है तो प्री-क्लोजर चार्जेज नहीं लगाना अनिवार्य है.

केवल मान्यताओं के आधार पर कोई कदम न उठाएं

समय से पहले लोन को बंद करने के अनुरोध से पहले अपने कर्जदाता से बात करें ताकि यह पता चले कि प्रोसेसिंग कैसे होगी और प्री-क्लोजर से जुड़े चार्जेज क्या हैं. इनकी कैलकुलेशन करें कि आप कौन सी राशि बचाएंगे और क्या यह आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास के लायक है. अगर विकल्प इस लायक है तो आगे बढ़ें और पर्सनल लोन पर प्री-क्लोजर की रिक्वेस्ट दें.

क्रेडिट स्कोर में इजाफा

क्रेडिट स्कोर सीधे बकाया कर्ज से जुड़ा होता है. अगर आप किसी लोन या क्रेडिट कार्ड के बकाए को समय से पहले ही चुका देते हैं तो यह आपके क्रेडिट स्कोर में नजर आता है. प्री-क्लोजिंग और आंशिक भुगतान वो समझदार तरीके हैं, जिनसे आप अपना क्रेडिट स्कोर बढ़ा सकते हैं. इसकी रैंकिंग के आधार पर ही बैंक और एनबीएफसी आपको भविष्य में लोन देने या न देने पर विचार करते हैं. लोन का पूर्व भुगतान बकाया कर्ज और क्लोजिंग लोन के सफल भुगतान के बराबर है. यह व्यक्तिगत और बैंकों को अच्छा फीडबैक देगा और एनबीएफसी को भविष्य में जरूरत पड़ने पर लोन देने में खुशी होगी.

उदाहरण के तौर पर

किसी शख्स ने 2 लाख रुपये का पर्सनल लोन 15 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर पर 5 साल की अवधि के लिए लिया. इस मामले में उसकी मासिक ईएमआई होगी 4758 रुपये. पहले साल के बाद ग्राहक ने 29,039 रुपये बतौर प्रीमियम और 28,057 रुपये बतौर ब्याज चुका दिए होंगे. इस मामले में अगर ग्राहक पूरे लोन की प्री-पेमेंट करने का फैसला करता है तो उसे ब्याज के तौर पर 57,422 रुपये कम चुकाने होंगे.

पर्सनल लोन में प्री-पेमेंट के कुछ फायदे भी हैं. प्री-पेमेंट चार्जेज तब लगते हैं, जब आप फिक्स्ड इंट्रस्ट रेट चुनते हैं और बैंक की स्थितियों के आधार पर यह 3 से 5 प्रतिशत के बीच होता है. बहुत सारे सार्वजनिक और निजी बैंक हैं, जो फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन पर प्री-क्लोजर फीस शुल्क नहीं लगाते. खास नियम और शर्तों को समझने के लिए अपने बैंकों से सीधे बात करना बहुत जरूरी है. इसलिए सभी उपलब्ध सूचनाओं का अच्छी तरह से विश्लेषण करें और पर्सनल लोन पर बकाया राशि का पूर्व भुगतान करना है या नहीं, इसका फैसला लें.

समय से पहले लोन के भुगतान के नुकसान

प्री-पेमेंट चार्जेज

प्रीपेमेंट चार्जेज/पेनाल्टी वह राशि होती है, जो ग्राहक लोन की राशि को समय से पहले ही चुकाने पर देता है. हर कर्जदाता का प्री-पेमेंट चार्ज अलग-अलग होता है. कुछ कर्जदाता ऐसे भी होते हैं, जो कोई प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं लगाते. लेकिन ये आपको कर्जदाता चुनते वक्त ही चेक करना होगा. प्री-पेमेंट पेनाल्टी के तौर पर ली जाने वाली राशि बकाया मूल राशि और बची हुई अवधि पर भी निर्भर करती है.

लॉक-इन पीरियड

ज्यादातर कर्जदाता जो कर्ज देते हैं, उसका लॉक-इन पीरियड होता है. इस दौरान ग्राहक लोन का प्री-पेमेंट नहीं कर सकता. आमतौर पर अधिकतर कर्जदाताओं का लॉक-इन पीरियड लोन वितरण के दिन से 12 महीने तक का होता है. तो अगर आपके पास लोन के प्री-पेमेंट के लिए पैसे हैं भी, तब भी आपको लॉक-इन पीरियड खत्म होने का इंतजार करना होगा.

सेविंग्स खत्म न करें

पैसा होना खुद में एक आशीर्वाद है. इसे निवेश कर आप भविष्य के लिए पूंजी तैयार करते हैं. साथ ही इमरजेंसी फंड भी बनाते हैं, ताकि अगर किसी अहम चीज की जरूरत हो तो वहां उसे खर्च किया जा सके. लेकिन प्री-पेमेंट करने पर आपकी सारी सेविंग्स भी खत्म हो सकती हैं.

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