प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेने पर कौन सी चीजें ज्यादा असर डालती हैं, जानिए

Loan Against Property Eligibility

किसी की भी जिंदगी में प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेना एक बेहद अहम फैसला माना जाता है. इसलिए यह अनिवार्य है कि आप 100 बार यह जरूर सोचें कि कौन से फैक्टर्स प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेने की योग्यता को प्रभावित करते हैं. कुछ अहम फैक्टर्स, जो एलिजिबिलिटी को प्रभावित करते हैं, उनके बारे में हम आपको बता रहे हैं:

प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेने की एलिजिबिलिटी को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

नियमित आय: प्रॉपर्टी के एवज में लोन या उस मामले के लिए कोई अन्य लोन लेने के लिए सबसे अहम और पहली आवश्यकता आवेदक की आय है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि यह गारंटी है कि आवेदक वक्त पर ईएमआई भर देगा. अगर आप ऐसे शख्स हैं, जिसकी आय स्थिर और नियमित नहीं है तो आपकी लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा होगी.

आवेदक की उम्र: यह भी एक अहम फैक्टर है, जो यह तय करने में अहम भूमिका अदा करता है कि कर्जदाता आपकी एप्लिकेशन मंजूर करेगा या नहीं. उदाहरण के तौर पर अगर आवेदक अगले कुछ वर्षों में रिटायर होने वाला है तो उसकी एप्लिकेशन रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा होगी. दूसरी ओर अगर आवेदक 20, 30 या 40 वर्ष की श्रेणी में है तो उसे लोन मिलना आसान होगा.

क्रेडिट हिस्ट्री: प्रॉपर्टी के एवज में लोन पाने के लिए आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री भी बेहद अहम फैक्टर है. यहां किसी भी तरह की चूक कर्जदाता को आपकी एप्लिकेशन मंजूर करने से रोक देगी. इसलिए समय पर लोन चुकाना जरूरी है ताकि CIBIL स्कोर के कारण आप मात न खाएं.

लोन की अवधि: जिन लोन्स की अवधि लंबी होती है, उनकी ईएमआई कम होती है. अगर आपकी इनकम कम है तो सलाह दी जाती है कि लंबी भुगतान अवधि चुनें ताकि ईएमआई कम देनी पड़े ताकि आप उसे वक्त पर और नियमित रूप से चुकाने की बेहतर स्थिति में हों.

नौकरी बदलना: अगर आप उन लोगों में से हैं, जो जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं तो हो सकता है कि कर्जदाता आपको लोन देने को राजी न हो. स्थिर नौकरी और नियमित आय कर्जदाता को यह विश्वास दिलाने के लिए काफी होता है कि आप वक्त पर ईएमआई का भुगतान करेंगे.

प्रॉपर्टी के दस्तावेज: जिस प्रॉपर्टी को आप गिरवी रख रहे हैं, उसके पूरे दस्तावेज सही तरह से लगे होने चाहिए. इसमें कर्जदाता द्वारा मांगे गए टाइटल डीड, कई प्राधिकरणों से अप्रूवल, बिल्डिंग प्लान और अन्य दस्तावेज होने चाहिए.

रिजेक्ट हुईं पिछली लोन एप्लिकेशन: वित्तीय संस्थान और बिचौलिये उन लोन आवेदनों का लेखा-जोखा रखते हैं, जिन्हें नामंजूर कर दिया गया है. अगर आपकी भी पहले लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हुई है तो यह आपकी क्रेडिट प्रोफाइल में दिखेगा और आपको लोन मिलने के चांस कम हो जाएंगे. यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेना बहुत आसान हो गया है और इसे आपको सिर्फ आपात स्थिति में ही लेना चाहिए. इस बात को समझें कि अगर आप वक्त पर ईएमआई का भुगतान नहीं कर पाए तो यह आपके क्रेडिट स्कोर में दिखेगा और भविष्य में आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है.

प्रॉपर्टी इंश्योरेंस: गिरवी रखी गई संपत्ति का बीमा होना चाहिए क्योंकि यह विश्वास बढ़ाने का उपाय है. बिमित संपत्ति कर्जदाताओं के दिमाग में सुरक्षा का भाव पैदा करती है और लोन मंजूरी की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं.

इनकम टैक्स रिटर्न्स (ITR): स्थिर नौकरी और अच्छा पैकेज होने के बावजूद आईटीआर न होने को लेकर आपकी लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है. पिछले 3-4 साल के सही से भरे आईटीआर दिखाते हैं कि आय नियमित है और यह लोन मिलने के चांस को भी बढ़ा देता है.

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