अगर बिजनेस में हो रहा है नुकसान तब भी बिजनेस लोन चुकाने के ये हैं 6 सर्वश्रेष्ठ तरीके

बिजनेस को चलाने में काफी मेहनत, लगन और रणनीति की जरूरत पड़ती है ताकि आपका बिजनेस किसी भी मुश्किल स्थिति से आसानी से बाहर निकल सके. लेकिन कई बार हर संकट के समय से निकलना मुश्किल हो जाता है. हाल के समय में हमने यह देखा भी है.

कोविड-19 के कारण अधिकतर एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम साइज एंटरप्राइजेज) लॉकडाउन की स्थिति का सामना कर रहे हैं और कई हफ्तों तक उनका काम ठप रहा. इससे वे पैसों की तंगी से घिर गए. कई कारोबारों के सामने ये मुश्किल खड़ी हो गई कि वे बिजनेस चालू रखें या फिर बंद कर दें.

आइए आपको 6 सर्वश्रेष्ठ तरीके बताते हैं, जिनका पालन कर आप नुकसान में भी अपना बिजनेस लोन आसानी से चुका सकते हैं.

अच्छा बैंक बैलेंस रखें

हमेशा यह सलाह दी जाती है कि अपने पास पर्याप्त बैंक बैलेंस रखें ताकि जरूरत के वक्त आप उसे इस्तेमाल कर सकें. यह रिजर्व अमाउंट के रूप में काम कर सकता है, जिसे मुश्किल समय में इस्तेमाल में लाया जा सकता है वो भी बिजनेस के लिए तय फंड को छेड़े. इसे इस नजरिए से भी देखा जा सकता है कि आपके पास लोन की ईएमआई के लिए 3-4 महीने की रिजर्व मनी है, जिसकी जरूरत पड़ेगी और अगर घाटे के कारण इस ईएमआई की बिजनेस फंड से निकासी नहीं की जा सकती तो यह रिजर्व मनी आपको ईएमआई डिफॉल्ट करने से बचा सकती है.

पेमेंट शेड्यूल के लिए रिमाइंडर्स लगाएं

अपने पेमेंट शेड्यूल को अच्छी तरह से व्यवस्थित और आसानी से सुलभ रखें, ताकि आपके पास फंड की उपलब्धता को पहले से जांचने का मौका हो. इससे आप अपने पैसों को सही तरीके से मैनेज कर पाएंगे. जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था करें, खासकर कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन जैसी स्थितियों में, जब आपको बिजनेस में प्रॉफिट नहीं हो रहा था. वक्त पर पेमेंट से आपकी इमेज कर्जदाता के सामने अच्छी बनी रहेगी. इससे आप भविष्य में कोई और रीपेमेंट ऑप्शन भी चुन सकते हैं.

कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग

भुगतान की जाने वाली राशि आपके लिए पर्याप्त हो सकती है, खासकर तब अगर आपका बिजनेस छोटा या मीडियम साइज का हो. आपको बता दें कि लोन की शर्तों को रीस्ट्रक्चर या रीशेड्यूल किया जा सकता है, वो भी डिफॉल्ट की स्थिति आने से पहले. यह निर्भर करता है कि आपके बिजनेस की परफॉर्मेंस और फाइनेंशियल सिचुएशन कैसी है. इसमें अप्रत्याशित खर्चे, ब्याज दरें और मासिक किस्त की राशि इत्यादि को रिवाइज किया जा सकता है. हालांकि ध्यान रहे कि यह आपके क्रेडिट स्कोर पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, लेकिन पुनर्भुगतान पर चूक की तुलना में यह एक छोटा मुआवजा होगा.

कर्जदाता के साथ नियमित और पारदर्शी संवाद बनाएं

कर्जदाता के पास आपकी वित्तीय स्थिति की साफ तस्वीर होनी जरूरी है ताकि जरूरी विकल्पों और उपायों की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय हो. वक्त-वक्त पर संवाद से कर्जदाता अपना पेपरवर्क और नुकसान घटा सकते हैं और इससे आप अपने लोन पर एक भी डिफॉल्ट होने से बचा सकते हैं. इस तरीके से कर्जदाता आपको विभिन्न विकल्प देंगे, जिससे आप अपनी लागत कम कर सकते हैं.

रीफाइनेंसिंग पर विचार करें

कई कर्जदाता रीफाइनेंसिंग लोन्स में भी मदद करते हैं. वे छोटी ईएमआई का विकल्प लंबी अवधि के लिए देते हैं. यह एक फाइनेंसिंग विकल्प है, जिसका इस्तेमाल आप शॉर्ट टर्म लोन्स से बचने के लिए कर सकते हैं. शॉर्ट टर्म लोन्स के लिए बहुत ज्यादा फंड्स की जरूरत होती है क्योंकि आपकी ईएमआई इसमें ज्यादा होगी. ये राशि आपके लिए मुसीबत साबित होगी क्योंकि आप इसका इस्तेमाल बिजनेस को बढ़ावा देने में नहीं कर पाएंगे.

दूसरी ओर, एक छोटी राशि से आप अपने बिजनेस में निवेश भी कर सकते हैं और लोन भी चुका सकते हैं. यह एक एहतियाती विकल्प है, जो आपकी जरूरत और झुकावों पर निर्भर करता है.

लोन रीपेमेंट को प्राथमिकता पर रखें और उसके लिए फंड आवंटित करें

फंड का सही प्रबंधन, भले ही इसके लिए आपको फाइनेंशियल एडवाइजर की जरूरत क्यों न पड़े, बहुत जरूरी है. सभी मासिक गतिविधियां, खर्चे और जरूरतें हमेशा एक समान नहीं रहते. कई काम इस वक्त सामने आ सकते हैं, लेकिन उन्हें लोन चुकाए जाने तक नजरअंदाज किया जा सकता है. इस तरह के पर्याप्त खर्चों से जितना संभव हो उतना बचा जाना चाहिए.

आखिर में, अपने पैसों और खास तौर पर लोन को बुद्धिमानी और समझदारी से मैनेज करने के लिए कदम उठाएं. उन स्थितियों में जहां किसी बिजनेस का नुकसान हो रहा है, अपने वित्त और विकल्पों को पहले से अच्छी तरह से समझें ताकि आप और कर्जदाता दोनों, एक खराब स्थिति से बचने के लिए उचित और समय पर कदम उठा सकें. स्पष्ट रहें और कर्जदाता के किसी भी नोटिस को नजरअंदाज न करें. हर कोई चाहता है कि उसका बिजनेस आगे बढ़े और आसान कदमों से आप बहुत आगे जा सकते हैं.

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