रेग्युलर बिजनेस लोन बनाम माइक्रोलोन्स, जानिए दोनों में फर्क

Regular Business Loans Vs Microloans

एक नियमित कैश फ्लो किसी भी कारोबारी के लिए शुरुआती कामयाबी होती है. यह तभी होगा, जब आपको पता हो कि पैसे के सही स्रोत को कैसे पहचाना जाए. जब तक आप ब्रेक-ईवन तक नहीं पहुंचते तब तक कारोबार को फायदे में चलाना मुमकिन नहीं है और इसलिए आपके बिजनेस से पैसा पैदा करना तुरंत समाधान नहीं हो सकता. इस तथ्य से परेशान न हों क्योंकि हर सफल कारोबारी इस चरण से गुजरा है.

क्या होता है माइक्रोलोन?

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि ये लोन्स कम अवधि और छोटी राशि के तौर पर दिए जाते हैं. अब, इस मूल परिभाषा के साथ और गहराई में न जाकर हमें बिजनेस लोन के बारे में कुछ बातों पर विचार मंथन करना चाहिए. आज हम आपको लोन चुनने के लिए सही फैसले के साथ बिजनेस लोन और माइक्रोलोन के बीच अंतर समझने में मदद करेंगे.

क्यों एक बिजनेसमैन लोन की तरफ देखता है?

लोन सिर्फ बिजनेस को शुरू करने के लिए ही नहीं लिया जाता, बल्कि उसे एक्टिवेट रखने, विस्तार करने और आगे ले जाने के लिए भी इसकी जरूरत पड़ती है. लिहाजा, बिजनेस में पैसों की जरूरत विभिन्न चरणों पर पड़ती है और कैश फ्लो हर बिजनेस के लिए एक बड़ा विश्वास होता है. आपातकालीन बिजनेस खर्चों के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है.
यह बिना किसी देरी के बिजनेस का विस्तार करता है. इसलिए कारोबारियों को बहुत फायदा होता है. लोन चुकाने का कोई खतरा नहीं है क्योंकि अवधि अच्छी होती है, जिससे कारोबारियों को बिजनेस में पैसों का इस्तेमाल करने या उसे घुमाने में समय लगता है.

बिजनेस लोन से क्या उम्मीदें होती हैं?

तेज प्रक्रिया, सर्वश्रेष्ठ ब्याज दरें, न्यूनतम सर्विस चार्ज, कम से कम पेपरवर्क, अच्छा पैसा इत्यादि. जी हां यही कुछ जरूरी पॉइंट्स हैं, जिन्हें हर कारोबारी देखता है और आप भी उन्हीं में से एक हैं. अब असली बात पर आते हैं. जी हां लोन की राशि. यहीं आप फंस जाते हैं. आइए आपको बिजनेस लोन और माइक्रोलोन के बारे में फर्क समझाते हैं, ताकि आप अपनी बिजनेस की जरूरतों को देखते हुए अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुन सकें.

सिर्फ बिजनेस लोन के बारे में जानना सिक्के को एक तरफ देखने जैसा है. माइक्रोलोन्स के बारे में भी आपके लिए जानना उतना ही जरूरी है. यहां हम आपको बिजनेस लोन और माइक्रोलोन्स के बीच फर्क बताने जा रहे हैं, ताकि आप खुद के लिए सही विकल्प चुन सकें.

बिजनेस लोन बनाम माइक्रोलोन?

जो राशि लोन के लिए चाहिए: पारंपरिक बिजनेस लोन की तुलना में, माइक्रोलोन्स छोटी राशि के लिए ले सकते हैं. 1 लाख जैसी छोटी राशि के लिए भी लोन लिया जा सकता है. दूसरी ओर, आप बिजनेस लोन छोटी और बड़ी राशि के लिए ले सकते हैं. अपनी सहूलियत के हिसाब से आप अवधि भी चुन सकते हैं. माइक्रोलोन्स समयबद्ध होते हैं और आप उन्हें छोटी अवधि के लिए भी ले सकते हैं.

ब्याज दरें: माइक्रो लोन्स की ब्याज दरें फिक्स होती हैं और आमतौर पर काफी ज्यादा भी. जबकि बिजनेस लोन्स में फ्लेक्सिबल ब्याज दरें होती हैं और ये बिजनेस फ्रेंडली होते हैं. विशेष रूप से एनबीएफसी ऐसी ब्याज दरें देते हैं जो उधारकर्ताओं की जरूरत के आधार पर व्यक्तिगत होती है.

लोन की अवधि: अगर राशि कम है तो अवधि भी कम होगी. लेकिन ब्याज दरें ज्यादा. गैर-लाभकारी संगठन माइक्रोलोन्स  देते हैं और इस तरह उन्हें पैसों की व्यवस्था करने की जरूरत होती है. उन्हें ऐसा करने के लिए समय चाहिए और इसलिए एडवांस बुकिंग करनी होगी. लेकिन, बिजनेस लोन कभी भी और किसी भी अवधि में लिया जा सकता है.

लोन के फीचर्स: माइक्रोलोन्स को केवल कुछ ही बिजनेस के लिए लिया जा सकता है और आपके पास किसी भी मकसद के लिए इस्तेमाल की सीमित आजादी है. लेकिन बिजनेस लोन के साथ ऐसा नहीं है. आप उसका इस्तेमाल कैश फ्लो को बढ़ाने, कच्चा माल खरीदने, सैलरी देने या फिर उन्हें रिजर्व के तौर पर कर सकते हैं. यह फ्लेक्सिबल है और आपको ब्याज तय तारीख पर देना होता है. पैसा कैसे इस्तेमाल करना है, यह आपके विवेक पर निर्भर करता है.

बिजनेस लोन के लिए कोई गारंटी नहीं रखनी होती. खासकर ये असुरक्षित जीएसटी बिजनेस लोन्स कोई भी गारंटी दिए बिना लिए जा सकते हैं. अगर आपके पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट है तो आप लोन का विकल्प चुन सकते हैं.

कम शब्दों में कहें तो आप माइक्रोलोन तब ले सकते हैं, जब कोई छोटा कारोबार जैसे फ्रीलांसिंग, मोबाइल, फूड इत्यादि शुरू कर रहे हों. कुछ पैसा मिलने से ऐसे लोग अपनी आजीविका चला सकते हैं. लेकिन बिजनेस लोन में आप कोई भी बिजनेस, लोन राशि और अवधि चुन सकते हैं. इससे आप उतनी तरक्की कर सकते हैं, जितनी आपने सोची है.

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