अपने होम लोन का बोझ कम करना चाहते हैं, अपनाएं ये टिप्स

होम लोन ब्याज दरों में जरा सा भी वृद्धि आपका बैलेंस बिगाड़ सकती है. आइए आपको कुछ टिप्स बताते हैं, जिससे आप अपनी होम लोन ब्याज दर घटा सकते हैं.

किसी घर की कीमत  किसी शख्स की बरसों या पूरे दशक की सेविंग्स के बराबर होती है. ऐसे में घर खरीदने के लिए सिर्फ होम लोन ही एकमात्र विकल्प रह जाता है. लेकिन, लंबी अवधि और ज्यादा राशि की वजह से बड़ी ईएमआई का बोझ आप पर पड़ जाता है, जिससे बाकी के कामों के लिए आपके पास पैसे कम बचते हैं. इसके अलावा, होम लोन की ब्याज दर ज्यादा हो जाने की वजह से आपका बजट भी बिगड़ सकता है. आइए आपको कुछ टिप्स बताते हैं, जिससे आप अपने होम लोन की ब्याज दर कम कर सकते हैं.

मौजूदा होम लोन ग्राहकों के लिए

होम लोन बैलेंस ट्रांसफर चुनें और अपनी लोन अवधि बढ़वाएं: अगर होम लोन की अवधि ज्यादा है तो ईएमआई कम होगी, हम में से अधिकतर लोग होम लोन की अवधि इसलिए बढ़वाते हैं, ताकि ईएमआई का बोझ कम हो जाए. लेकिन मौजूदा कर्जदाता के पास जाकर लोन की अवधि को और बढ़वाने को लोन रीस्ट्रक्चरिंग कहा जाता है, जो एक पुनर्लेखन मानक के दायरे में आ सकता है. इससे ग्राहक के क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ेगा और भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में मुश्किल हो सकती है. इसकी जगह, होम लोन बैलेंस ट्रांसफर चुनें, जो कम ब्याज दरों और लंबी अवधि के लिए हो.

उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि आपने 35 लाख रुपये का होम लोन 9.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर 22 साल के लिए लिया है. आपकी मासिक ईएमआई है 31,656. फिलहाल आपकी बकाया होम लोन राशि 30.31 लाख रुपये है और लोन अवधि 15 साल बची हुई है.

अगर आप किसी दूसरे कर्जदाता के पास बाकी बचे 15 वर्ष के लिए होम लोन बैलेंस ट्रांसफर कराना चाहते हैं, जिसकी ब्याज दर 8.5 प्रतिशत है तो ईएमआई घटकर 29,853 रुपये पर आ जाएगी. वहीं अगर आप 25 साल की लंबी अवधि चुनेंगे तो ईएमआई और घटकर 24,411 रुपये हो जाएगी. लेकिन ज्यादा लोन अवधि के कारण आपको ज्यादा ब्याज चुकाना होगा. भविष्य में अगर आपके पास अतिरिक्त पैसे हों तो आप लोन को समय से पहले भी चुका सकते हैं.

याद रखें कि नया कर्जदाता आपकी होम लोन बैलेंस ट्रांसफर की एप्लिकेशन को फ्रेश होम लोन एप्लिकेशन के तौर पर लेगा. लिहाजा प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्जेज इत्यादि जैसे शुल्क लगेंगे. इसलिए बैलेंस ट्रांसफर से पहले इन चार्जेज के बारे में जरूर विचार कर लें. इसलिए बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प तभी चुनें, जब बचत ब्याज बैलेंस ट्रांसफर की राशि से ज्यादा हो.

नए ग्राहकों के लिए

1. बड़ी होम लोन अवधि चुनें: होम लोन एप्लिकेशन लगाते वक्त लंबी होम लोन अवधि चुनें. इससे न सिर्फ आपकी ईएमआई कम होगी बल्कि लोन एलिजिबिलिटी भी बढ़ेगी. लेकिन साथ ही लंबी अवधि के कारण लोन पर ब्याज की लागत भी बढ़ जाएगी. इसलिए भविष्य में अगर आपके पास पैसे होते हैं तो कुछ प्री-पेमेंट्स देने की कोशिश करें. याद रखें कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फ्लोटिंग रेट लोन्स के मामले में प्री-पेमेंट फीस बदलने को लेकर कर्जदाताओं पर रोक लगा रखी है. वहीं फिक्स्ड रेट लोन्स के मामले में वे यह शुल्क लगा या हटा सकते है. ऑनलाइन ईएमआई कैलकुलेटर्स का इस्तेमाल करें ताकि अपनी पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर सही लोन अवधि चुन सकें.

2. ज्यादा डाउन पेमेंट भरें: RBI ने कर्जदाताओं को 75-90 प्रतिशत प्रॉपर्टी लागत को होम लोन के रूप में फाइनेंस करने की इजाजत दी है. ग्राहकों को बाकी की राशि बतौर डाउन पेमेंट अपनी जेब से देनी होगी. अधिकतर ग्राहक कम डाउन पेमेंट के विकल्प को चुनते हैं. जबकि ग्राहकों के लिए ज्यादा डाउन पेमेंट का विकल्प सर्वश्रेष्ठ होता है. ज्यादा डाउन पेमेंट चुकाने से लोन राशि कम हो जाती है, जिससे कम ब्याज लागत और ईएमआई हो जाती है. ज्यादा डाउन पेमेंट चुकाने से लोन अप्रूवल के चांस भी बढ़ जाते हैं क्योंकि कर्जदाता का जोखिम कम हो जाता है. लेकिन ज्यादा डाउन पेमेंट चुकाते वक्त अपने इमरजेंसी फंड या सेविंग्स का त्याग न करें. ऐसा करने से आपको बाकी कामों के लिए ज्यादा ब्याज पर लोन लेना पड़ेगा.

3. विभिन्न कर्जदाताओं के लोन ऑफर्स की तुलना करें: किसी कर्जदाता को फाइनल करने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस के आधार पर लोन ऑफर्स के विकल्पों पर विचार कर लें. अलग-अलग कर्जदाताओं की अलग-अलग ब्याज दर और उससे जुड़े शुल्क होते हैं. उदाहरण के तौर पर, कई कर्जदाता कम दरों पर उन ग्राहकों को होम लोन देते हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर बहुत ज्यादा होता है. कई लोग अपनी नौकरी और कंपनी को देखते हुए लोन की दरों को तय करते हैं.

आज एचएफसी और विभिन्न बैंक होम लोन ऑफर कर रहे हैं इसलिए आप ऑनलाइन जाकर ब्याज दरों की तुलना कर सकते हैं. ये लोग आपके क्रेडिट स्कोर, मासिक आय, जॉब प्रोफाइल और अन्य एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को देखते हुए होम लोन देते हैं.

Leave a Comment