असुरक्षित मशीनरी लोन पाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

असुरक्षित मशीनरी लोन नई मशीनें खरीदने और उन्हें अपग्रेड करने के लिए लिया जाता है ताकि उत्पाद के साथ-साथ बिक्री और मुनाफा भी बढ़े. भारत में विभिन्न नियम व शर्तों पर कई कर्जदाता मशीनरी लोन मुहैया कराते हैं, वो भी बिना सिक्योरिटी के. लिहाजा, यह जानना असुरक्षित मशीनरी लोन के लिए अप्लाई करने से पहले आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए ताकि आप अच्छा फैसला ले सकें. इस ब्लॉग में हम उन बातों के बारे में बात करेंगे, जो असुरक्षित मशीनरी लोन लेने से पहले ध्यान में रखनी जरूरी हैं.

छोटे बिजनेस की शुरुआत अच्छे रेवेन्यू आने और प्रोडक्टिव आउटपुट की सोच से शुरू होती है. बाजार में जमने और अच्छी ग्रोथ के लिए कारोबारी को बिजनेस लोन के तौर पर बाहरी फंड्स को भी देखना चाहिए. इन फंड्स का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल को बढ़ाने से लेकर नई मशीनें खरीदने तक किया जा सकता है.

सही और अपग्रेडेड मशीनरी बिजनेस के लिए बहुत उपयोगी है. यह कर्मचारियों को अपने कार्यों को ऑटोमेट करने में मदद कर सकता है, जिससे कम समय में तय काम पूरे हो जाते हैं. लेटेस्ट मशीनरी होने से प्रोडक्शन बढ़ता है साथ ही मानव संसाधन में भी इजाफा होता है.

इसलिए नई मशीनरी और बेहतर प्रोडक्शन के लिए इक्विपमेंट के लिए कारोबारी असुरक्षित मशीनरी लोन लेने के बारे में सोच सकते हैं. असुरक्षित मशीनरी लोन वह कर्ज होता है, जिसके लिए कई सिक्योरिटी नहीं देनी पड़ती. कारोबारियों को मशीनें खरीदने को लेकर लोन पाने के लिए कई गारंटी नहीं देनी पड़ती.

लेकिन मशीनरी लोन लेने से पहले कारोबारियों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि सही फैसले ले सकें. आइए इनमें से कुछ के बारे में विस्तार से बताते हैं.

जरूरत को पहचानें

बिजनेस लोन की जरूरतों के बारे में कारोबारी को पता होना चाहिए. अगर पहले से ही मशीनें हैं आपके पास तो उनकी उत्पादन क्षमता को चेक करें और जरूरत के हिसाब से अपग्रेड करने के लिए सही कदम उठाएं. इसके अलावा, कारोबारी को यह भी देखना पड़ेगा कि क्या सिर्फ अपग्रेड से काम चल जाएगा या फिर नई मशीनों की जरूरत पड़ेगी.

जरूरत को पहचानने के साथ-साथ, बिजनेसमैन को सही मशीनों और उपकरणों को खोजना चाहिए जो उसके बिजनेस के लायक हो. उसे मशीनरी और उसके अधिकतम आउटपुट पर ज्यादा रिसर्च करनी चाहिए. पहचान के बाद, असुरक्षित मशीनरी लोन लिया जा सकता है.

जगह की जरूरत

पर्याप्त मशीनरी होने का यह मतलब भी है कि आपके पास ऑफिस में उसके लिए पर्याप्त जगह भी हो ताकि काम सुचारू रूप से होता रहे. अगर जगह नहीं है तो कारोबारी मशीनरी को लीज पर ले सकता है. लेकिन अगर वह मशीनरी खरीदने की योजना बना रहा है तो उसके पास ब्लूप्रिंट होना चाहिए कि वह मशीनें और उपकरण कहां लगाएगा.

हमारी सलाह है कि यह पहले से ही तय कर लें कि मशीनरी कहां लगानी है. मशीनों को लगाने की जगह को लेकर कोई समझौता नहीं होना चाहिए.

मशीनरी जरूरतें

कौन सी मशीनें चाहिए, ये तय होने के बाद अगला कदम यह समझने के लिए है कि नई मशीनरी की जरूरत है या फिर पहले से उपयोग हो चुकी मशीनों की. अब मशीनरी पर कॉल लेने का समय है कि क्या पुरानी मशीनरी से काम चल जाएगा या नहीं. लेकिन सलाह दी जाती है कि अगर बिजनेसमैन मशीनरी इंस्टॉल करने पर विचार कर रहा है, जिसे लंबे समय तक चलना है तो नई मशीन लेना ही सही विकल्प है.

मशीनरी फाइनेंसिंग

असुरक्षित बिजनेस लोन दो विकल्पों के तहत लिए जा सकते हैं या तो बिजनेस मैन को एकमुश्त पैसा (स्टैंडर्ड टर्म) पर मिल जाए या फिर लाइन ऑफ क्रेडिट पर. अगर बिजनेसमैन इस बात को लेकर सुनिश्चित है कि मशीनों पर कितना पैसा लगेगा तो उसे स्टैंडर्ड लोन के विकल्प को चुनना चाहिए. इसके अलावा, स्टैंडर्ड लोन एक निश्चित अवधि में समान ईएमआई के रूप में चुकाया जा सकता है.

ईएमआई कैलकुलेट करें

कारोबारी को ईएमआई और मशीनरी लोन की ब्याज दर की कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए. इससे यह पता चल जाएगा कि वह लोन चुका भी सकता है या नहीं. बिजनेसमैन ईएमआई कैलकुलेटर की मदद ले सकता है. साथ ही उसे रीपेमेंट अवधि भी ध्यान से चुननी चाहिए.

खासतौर पर, लंबा कार्यकाल होने से ईएमआई चुकानी आसान हो जाएगी. लेकिन ब्याज ज्यादा लगेगा. जबकि छोटे कार्यकाल में ब्याज कम लगेगा लेकिन ईएमआई राशि बढ़ जाएगी. इसलिए अवधि आपको ध्यान से चुननी है.

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