बिजनेस के लिए लोन कितने तरह के होते हैं?

बिजनेस लोन लेते वक्त ऋण किस तरह का लें ये पसोपेश की भावना हर बिजनेसमैन के मन में होती है. भारत में कर्जदाता विभिन्न प्रकार के लोन देते हैं. लिहाजा इस तरह के लोन बिजनेसमैन को कन्फ्यूज कर देते हैं. लेकिन ऐसे लोन बिजनेस की अलग-अलग जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किए जाते हैं. लिहाजा यह जानने के लिए कि आपके बिजनेस के लिए कौन सा लोन सही रहेगा आपको यह  समझना होगा कि आप किस मकसद के लिए ऋण ले रहे हैं.

आइए आपको बताते हैं कि भारत में कितने प्रकार के बिजनेस लोन दिए जाते हैं.

मशीनरी लोन

किसी भी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए मशीनरी एक अहम चीज है. कितने उत्पाद बने और प्रोडक्शन की लागत मशीनरी या उपकरण पर ही निर्भर करती है. मशीनरी यह भी तय करती है कि जो उत्पाद पैदा हुआ, उसकी क्वॉलिटी कैसी है. इसके अलावा, कस्टमर या क्लाइंट की डिमांड को समय पर पूरी करने में भी मशीनरी की ही अहम रोल होता है.

कहा जाता है कि मशीनरी बेहद महंगी होती हैं और बिजनेसमैन के लिए यह हर बार मुमकिन नहीं कि वह फंड लेकर मशीनरी में निवेश कर सके. लेकिन मशीनों को अपग्रेड करना बेहद जरूरी है. लिहाजा मशीनरी लोन आपकी इस जरूरत को पूरा कर सकता है. बेहतर ब्याज दरों पर इस तरह के लोन भारत में कर्जदाता मुहैया कराते हैं.

वर्किंग कैपिटल लोन

बिजनेस के लिए वर्किंग कैपिटल ऑक्सीजन की तरह है. चाहे सर्विस सेक्टर हो, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हो या फिर ट्रेडिंग, उसके लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ती है. हर बिजनेस में हर दिन कुछ न कुछ काम होता है और पेमेंट के लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ती है. ये खर्च यूटिलिटी बिल्स, ऑफिस रेंट सैलरी इत्यादि होते हैं.  अगर बिजनेस के बार पर्याप्त वर्किंग कैपिटल नहीं है तो वह वर्किंग कैपिटल लोन लिया जा सकता है. लेकिन वर्किंग कैपिटल लोन थोड़े वक्त की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे कैपिटल इन्वेस्टमेंट के तौर पर यूज नहीं किया जा सकता.

कैपिटल लोन

कैपिटल यानी पूंजी. इसे व्यापारी अपना बिजनेस शुरू करने और चलाने के लिए इस्तेमाल करता है. किसी भी व्यापारी के लिए यह बुनियादी जरूरत है. जब भी बिजनेस स्टार्ट होता है तो व्यापारी अपनी पूंजी निवेश करता है. लेकिन समय के साथ सेविंग्स खत्म हो जाती हैं और कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है.

इसलिए जरूरतों को पूरा करने के लिए कैपिटल लोन लिया जा सकता है. कैपिटल लोन की उस वक्त भी बहुत जरूरत पड़ती है, जब बिजनेसमैन को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं लेकिन वह फंड की कमी के कारण दोनों हाथों से उसे स्वीकार नहीं कर पाता. ये बात ध्यान रहे कि इस तरह के लोन सिर्फ कैपिटल इन्वेस्टमेंट और बिजनेस एक्सपेंशन के लिए होते हैं और इन्हें किसी अन्य मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

फ्लेक्सी लोन

हर व्यापारी को ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ता है, जब उसे तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है. और वह कुछ दिनों का इंतजार भी नहीं कर सकता ताकि लोन के लिए अप्लाई करे और वह तुरंत मंजूर होकर उसके खाते में आ जाए. ऐसी स्थितियों में फ्लेक्सी लोन किसी वरदान से कम नहीं. फ्लेक्सी लोन नई जनरेशन का लोन है जिसमें कर्जदाता ऋण लेने वाले के लिए एक निश्चित समय के लिए लोन की सीमा तय कर देते हैं. कर्ज लेने वाला इस फंड का इस्तेमाल जब भी जरूरत पड़े सीमा खत्म होने तक कर सकता है. उसे सिर्फ उतनी ही राशि पर ब्याज चुकाना होगा, जितनी राशि उसने इस्तेमाल की है. ध्यान दें कि इसकी समयसीमा एक साल की होती है और कर्ज लेने वाला इसे हर साल रिन्यू करा सकता है.

टर्म लोन

जब व्यापारी को यह मालूम हो कि उसे किस अवधि के लिए बिजनेस लोन लेना है तो वह टर्म लोन ले सकता है. टर्म लोन अकसर छोटी अवधि यानी शॉर्ट टर्म के लिए लिया जाता है. उदाहरण के तौर पर कहें तो 1 साल. टर्म लोन छोटे व्यापारियों के लिए काफी फायदेमंद है क्योंकि कम अवधि में ही वे इसे चुका भी सकते हैं.

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