क्या होगा अगर आपने पर्सनल लोन की ईएमआई नहीं चुकाई?

आप पर्सनल लोन का इस्तेमाल उच्च शिक्षा, छोटे घर के रेनोवेशन, बेटी की शादी, बड़ी खरीद, वेकेशन या मेडिकल इमरजेंसी के समय में कर सकते हैं. लेकिन जब आप पर्सनल लोन लेते हैं तो आपको मासिक किस्त भी चुकानी होती है. इसके लिए आपको अनुशासित होना पड़ता है.

लेकिन आप जानते हैं कि पर्सनल लोन नहीं चुकाने पर क्या होगा? पर्सनल लोन के भुगतान पर कर्जदाता क्या एक्शन लेगा? क्या डिफॉल्टर को जेल जाना पड़ेगा?

इससे पहले कि हम नतीजों पर पहुंचें, आइए जानते हैं कि डिफॉल्टर्स किस प्रकार के होते हैं.

लापरवाह ग्राहक

लापरवाह ग्राहक वो लोग होते हैं तो ईएमआई/एनएमआई रेश्यो के विश्लेषण बिना ही ज्यादा लोन ले लेते हैं. ईएमआई की तारीख आने पर इन लोगों के पास पैसे होते नहीं हैं और ये लोन डिफॉल्टर हो जाते हैं.

विलफुल डिफॉल्टर

विलफुल डिफॉल्टर वे लोग होते हैं, जिनकी चुकाने की क्षमता होती है, लेकिन वे लोग नहीं चुकाते. विलफुल डिफॉल्टर्स कर्जदाता को झूठे कारण बताकर मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं. आरबीआई के रेग्युलेशन के मुताबिक, विलफुल डिफॉल्ट कई कारणों से होते हैं जैसे पैसे होते हुए भी कर्ज न चुकाना, डिफाल्टिंग यूनिट को पैसे देना, संपत्ति और आय की गलत जानकारी और धोखाधड़ी वाले लेन-देन करना. विलफुल डिफॉल्टर्स को भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 420 के तहत जेल हो सकती है.

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असली डिफॉल्टर

कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो लंबे समय से नियमित रूप से ईएमआई भर रहे थे लेकिन कुछ निजी कारणों जैसे नौकरी जाना, मेडिकल इमरजेंसी, पैसों की कमी इत्यादि के कारण ईएमआई चुकाने में असमर्थ हैं. जिन ग्राहकों की समस्याएं असली हैं, उनके कुछ अधिकार होते हैं और उन्हें कोई भी कर्जदाता टॉर्चर नहीं कर सकता.

पर्सनल लोन नहीं चुकाने का ये हो सकता है खामियाजा

1. क्रेडिट स्कोर पर पड़ेगा बुरा असर: जब भी कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए अप्लाई करता है तो क्रेडिट से जुड़ी उसकी जानकारी CIBIL और अन्य क्रेडिट ब्यूरोज को भेज दी जाती है. लिहाजा, अगर ग्राहक ने क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर डिफॉल्ट किया है तो उसके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ता है. नतीजन, भविष्य में ग्राहक को लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

2. कर्जदाता से फॉलो-अप: जैसे ही आप एक भी ईएमआई मिस करते हैं तो कर्जदाता आपसे फॉलोअप लेने लगता है. बैंक आपको खतों और ई-मेल्स भेजता है, जिसमें ब्याज के साथ ओवरड्यू अमाउंट और पेनाल्टी चार्जेज लिखे होते हैं. अगर 3 महीने से अधिक तक आप लोन नहीं चुकाते तो बैंक कानूनी एक्शन ले सकता है.

3. गारंटी जब्त करना: सुरक्षित लोन के मामले में बैंक उस संपत्ति को जब्त कर सकता है, जिसे आपने लोन के एवज में गिरवी रखा है. इसी से बैंक अपना नुकसान पूरा करता है. अगर गारंटर अग्रीमेंट के तहत कोई सह-आवेदक या गारंटर है तो बैंक उससे भी लोन चुकाने को कह सकता है.

4. कानूनी कार्यवाही: अगर कई बार याद दिलाने के बाद भी आप लोन नहीं चुकाते हैं तो कर्जदाता आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के लिए मजबूर हो जाएगा. बैंक आपका सेविंग्स अकाउंट ब्लॉक कर सकता है या आपराधिक मुकदमा दायर कर सकता है.

5. पोस्ट डेटेड चेक का इस्तेमाल करें: बैंक अकसर लोन देते वक्त दस्तखत और बिना तारीख वाले लोन अपने रखते हैं. जब आप लोन भुगतान नहीं करते तो बैंक ये चेक क्लीयरेंस के लिए रख देते हैं. चेक बाउंस होने पर बैंक आपके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के सेक्शन 138ए के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार तक करा सकता है.

लिहाजा अगर आप किसी वित्तीय समस्या के कारण बैंक को पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं तो सलाह यही है कि बैंक या कर्जदाता से सीधे इस मुद्दे पर बात करें.

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न चुकाए हुए लोन पर बातचीत कैसे करें

 

अगर आप पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं तो बैंक या एनबीएफसी, जिससे भी आपने लोन लिया है, उससे संपर्क करें. अगर आपका कर्जदाता आरबीआई से मान्यता प्राप्त है और आपने पहले से ही अपनी समस्या के बारे में बताया हुआ है तो बैंक आपकी मदद करने के लिए हर संभव काम करेगा और आप परेशानी में भी नहीं फंसेंगे. बैंक आपकी इन तरीकों से मदद कर सकता है.

 

1. ईएमआई घटाना: अगर आप ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं तो बैंक लोन की अवधि बढ़ाकर ईएमआई कम कर देता है. इसे लोन रीशेड्यूलिंग ऑफ रीस्ट्रक्चरिंग कहा जाता है. छोटी राशि होने के कारण आप ईएमआई चुका सकते हैं. लेकिन एक तय सीमा से ज्यादा लोन की अवधि बढ़ाई नहीं जा सकती.

2. असुरक्षित लोन की सुरक्षित लोन में तब्दीली: बैंक ईएमआई कम करने के लिए किसी असुरक्षित लोन को सुरक्षित में तब्दील कर सकता है.

3. ईएमआई फ्री पीरियड: अगर पैसों की तंगी होने के कारण आप लोन नहीं चुका पा रहे हैं तो इस तरह की सुविधा आपकी मदद कर सकती है. नौकरी जाने, बिजनेस में नुकसान, मेडिकल इमरजेंसी और जरूरी खर्चों के मामले में बैंक एक निश्चित समय जैसे 2-8 महीने में ईएमआई चुकाने में छूट देता है. जैसे ही आपके पास फिर से पैसे आने लगते हैं आप ईएमआई की पेमेंट को फिर शुरू करा सकते हैं. लेकिन लंबे समय तक ईएमआई नहीं चुकाने से ग्राहक और कर्जदाता के संबंध खराब होते हैं.

4. लोन सेटलमेंट: कई बार, ग्राहक अब या निकट भविष्य में लोन चुकाने में असमर्थ होता है. लेकिन वह लोन का एक हिस्सा चुकाकर लोन का निपटारा करने को तैयार है. बैंक इस ऑफर को मान सकता है क्योंकि बैंक को अपने लोन का कुछ हिस्सा तो मिलेगा. लेकिन लोन सेटलमेंट की वजह से आपके क्रेडिट स्कोर पर काफी बुरा असर पड़ेगा.

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