क्या होता सेंक्शन लेटर, जिसकी पर्सनल लोन प्रोसेस में पड़ती है जरूरत

सेंक्शन लेटर

किसी शख्स को 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन चाहिए. वह किसी बैंक में अप्लाई करता है और 13.09 प्रतिशत की ब्याज दर पर उसे लोन अप्रूवल लेटर मिल जाता है. लेकिन जिस ब्याज दर पर उसे लोन बैंक से मिल रहा है, उससे वह संतुष्ट नहीं है. तो वह कम ब्याज दर के लिए अप्रूवल लेटर के साथ दूसरे बैंक में जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि ये अप्रूवल लेटर क्या है? आसान भाषा में कहें तो इसे सेंक्शन लेटर कहा जाता है. आइए आपको बताते हैं कि सेंक्शन लेटर की अहम खासियतें क्या हैं:

– बैंक या कर्जदाता ऐसे शख्स को सेंक्शन लेटर (मंजूरी पत्र) जारी करता है, जिसने लोन के लिए अप्लाई किया होता है.
– इस पत्र से आवेदक को यह अधिकार दिए जाते हैं कि वह सेंक्शन लेटर में लिखे कुछ नियम व शर्तों को पूरा करने के बाद बैंक से एक निश्चित राशि का हकदार है.
– लोन आमतौर पर एक पर्याप्त राशि है, एक कर्जदाता को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सब कुछ क्रम में है. आखिरी लोन अग्रीमेंट देने से पहले, कर्जदाता एक मंजूरी पत्र  जारी करता है, जिसमें वह बताता है कि एक आवेदक को लोन मंजूर किया गया है.
– सेंक्शन लेटर तुरंत जारी नहीं किया जाता. पहले आवेदक अपने दस्तावेज देता है. इसके बाद कर्जदाता दस्तावेजों की वेरिफिकेशन करता है. जब कर्जदाता राजी हो जाता है तो  वह लोन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा देता है.

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नीचे हमने आपको कुछ अहम बातों की एक लिस्ट दी है, जिन पर मंजूरी पत्र जारी करने से पहले कर्जदाता विचार करता है:

• आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री
• आवेदक की कर्ज चुकाने की क्षमता
• आवेदक की वर्तमान आय
• दिए गए दस्तावेज असली हैं या नहीं
• आवेदक की आय के स्रोत
• बकाया ऋण, अगर कोई है तो.

सेंक्शन लेटर की अहमियत

• सेंक्शन लेटर लोन मंजूर होने का लेटर है, जिसकी एक वैधता होती है.
• लोन पाने के लिए सेंक्शन लेटर हासिल करना जरूरी है.
कम ब्याज दर पर बातचीत करने के लिए सेंक्शन लेटर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
• लोन प्रोसेसिंग में भी ये एक अहम फैक्टर है.

सेंक्शन लेटर में क्या होता है

एक लोन सेंक्शन लेटर का फॉर्मेट हर कर्जदाता का अलग-अलग हो सकता है. इसलिए लोन दस्तावेजों पर साइन करने से पहले कस्टमर रिलेशनशिप ऑफिसर से बात करना जरूरी है. सेंक्शन लेटर में दिए गए सामान्य विवरण इस तरह हैं:

– सेंक्शन लोन अमाउंट
– लोन रीपेमेंट अवधि
– लोन की राशि पर किस तरह का ब्याज लगेगा- फिक्स्ड, फ्लोटिंग या हायब्रिड.
– लोन वितरण के वक्त लागू होने वाली असली ब्याज दर.
– वो बेस रेट, जिस पर ब्याज को कैलकुलेट किया गया है.
– लागू ईएमआई और प्री-ईएमआई राशि.
– सेंक्शन लेटर की वैधता अवधि.
– जो नियम या शर्तें कर्जदाता लोन अग्रीमेंट में डलवाना चाहता है.

सेंक्शन लेटर की वैधता

एक आवेदक को पता होना चाहिए कि सेंक्शन लेटर लोन की कानूनी मंजूरी नहीं है. उन्हें कई दस्तावेज जमा कराकर कर्ज वितरण से पहले लोन दस्तावेज साइन करने पड़ते हैं. आमतौर पर सेंक्शन लेटर की वैधता 6 महीने की है और अगर इस अवधि में लोन नहीं लिया जाता तो सेंक्शन लेटर बेकार हो जाएगा.

सेंक्शन लेटर के लिए जरूरी दस्तावेज

सेंक्शन लेटर जारी करते वक्त हर कर्जदाता विभिन्न दस्तावेजों की मांग करता है. लेकिन पर्सनल लोन के लिए दस्तावेजों की सूची हर कर्जदाता की अलग-अलग होती है. ये वो दस्तावेज हैं, जिन्हें आपको जमा कराने की जरूरत पड़ सकती है:

– अच्छी तरह भरा गया पर्सनल लोन एप्लिकेशन फॉर्म
– अड्रेस प्रूफ
– ट्रैक रिकॉर्ड के साथ लोन आउटस्टैंडिंग लेटर
– पिछले तीन महीनों का बैंक स्टेटमेंट (6 महीने की पासबुक)
– फॉर्म 16
– लेटेस्ट सैलरी स्लिप्स
– बुनियादी केवाईसी दस्तावेज जैसे पासपोर्ट की कॉपी, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड
– मौजूदा तारीख का सैलरी सर्टिफिकेट
– इनकम टैक्स रिटर्न्स

ध्यान रहे कि सेंक्शन लेटर मिलने का मतलब कानूनी तौर पर लोन राशि की मंजूरी नहीं है. लोन राशि को वितरित करने से पहले, आवेदक को कुछ दस्तावेज जमा कर लोन अग्रीमेंट साइन करने होते हैं. सेंक्शन लेटर पर्सनल लोन की प्रक्रिया में एक अहम दस्तावेज है, जिसे आप भविष्य में कहीं दिखाने के लिए भी अपने पास रख सकते हैं. कम ब्याज दर पर लोन लेने के लिए सेंक्शन लेटर आपका छिपा हुआ हथियार है.

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