पर्सनल लोन की असली लागत आखिर क्या होती है, जानिए

Personal Loan

जब बात फाइनेंशियल इमरजेंसी की आती है तो पर्सनल लोन कई लोगों के लिए पहली पसंद होती है क्योंकि इसका इस्तेमाल किसी भी तरह किया जा सकता है. इसमें एप्लिकेशन आसान होती है, विभिन्न भुगतान विकल्प, आकर्षक ब्याज दरें, न्यूनतम दस्तावेज और तुरंत वितरण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं. पर्सनल लोन 50 लाख रुपये तक मिल सकता है और इसे विभिन्न स्थितियों जैसे मेडिकल इमरजेंसी, शादी, लंबी छुट्टियां और घर रेनोवेशन कराने के लिए लिया जा सकता है.

पर्सनल लोन की असली लागत क्या होती है?

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पर्सनल लोन के साथ जुड़ी असली लागत क्या होती है? लोन की राशि और ब्याज दर जो आप हर महीने ईएमआई के रूप में अवधि खत्म होने तक चुकाते हैं, उसके अलावा पर्सनल लोन में अतिरिक्त ये शुल्क जुड़े होते हैं.

ब्याज दरें

चूंकि पर्सनल लोन असुरक्षित लोन है इसलिए कार लोन या होम लोन की तुलना में इसकी ब्याज दरें ज्यादा होती हैं. पर्सनल लोन की ब्याज दर 10.50 प्रतिशत से शुरू होती हैं और अवधि खत्म होने तक किफायती ईएमआई के रूप में भुगतान की जाती हैं. बैंक किसी ग्राहक को ब्याज दर उसकी उम्र, क्रेडिट स्कोर, एम्प्लॉयर, रीपेमेंट हिस्ट्री इत्यादि देखकर देता है.

प्रोसेसिंग फीस

प्रोसेसिंग फीस में प्रशासनिक लागत आती है, जिसे बैंक को लोन एप्लिकेशन अप्रूव और प्रोसेसिंग के वक्त उठाना पड़ता है. प्रोसेसिंग फीस आमतौर पर लोन राशि के 0.5 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत प्रति वर्ष तक होती है. ये या तो लोन की राशि में से कट जाता है या फिर अलग से चुकाना पड़ता है. प्रोसेसिंग फीस अधिकतर बैंक वापस नहीं करते, जिसका मतलब है कि अगर आप अप्रूवल के बाद लोन कैंसल कर देते हैं तब भी कर्जदाता इसे वापस नहीं करेगा.

गुड्स एंड सर्विस टैक्स

फिलहाल लोन से जुड़ी सभी सुविधाओं जैसे प्री-पेमेंट एंड पार्ट पेमेंट चार्जेज, प्रोसेसिंग फीस, कैंसेलेशन चार्जेज, डुप्लीकेट स्टेटमेंट इशुएंस चार्जेज इत्यादि पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है. लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि जीएसटी ब्याज दरों पर लागू नहीं होता है.

ईएमआई बाउंस चार्जेज

अगर आप कोई ईएमआई मिस करते हैं तो आपको ईएमआई बाउंस चार्जेज चुकाने पड़ेंगे.

प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्जेज

पर्सनल लोन की अवधि खत्म होने से पहले बैंक ग्राहक को प्रीपेमेंट का विकल्प देता है. हालांकि कुछ बैंकों का लॉक-इन पीरियड होता है, जो 6 से 12 महीने का होता है. इसका मतलब है कि आप इस लॉक इन पीरियड के दौरान प्री-पेमेंट नहीं कर सकते. साथ ही, हर बैंक प्री-पेमेंट चार्जेज वसूलते हैं, जिनकी दरें अलग-अलग होती हैं.

लोन रद्द करने का शुल्क

अगर आपने लोन के अप्रूवल या फिर लोन राशि के वितरण के बाद अपना मन बदलकर पर्सनल लोन रद्द कराने का मन बना लिया है तो कर्जदाता आपसे लोन रद्द करने का शुल्क भी मांग सकता है. बैंक या तो 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ सीधे रद्द करने का शुल्क मांग लेगा या फिर जिस दिन लोन वितरित हुआ, उससे लेकर जिस दिन लोन रद्द हुआ के बीच का ब्याज लगा सकता है.

रीपेमेंट माध्यम बदलने का शुल्क

अगर आप पर्सनल लोन के भुगतान का माध्यम (ऑटो डेबिट से चेक) बदलना चाहते हैं तो आपको शुल्क देना होगा. जब भी आप लोन अवधि में रीपेमेंट मोड बदलेंगे कर्जदाता आपसे 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ 500 रुपये ले सकता है.

डुप्लीकेट डॉक्युमेंटेशन चार्जेज

कई बैंक लोन से जुड़े दस्तावेज जैसे इंडेक्स स्टेटमेंट्स, एनओसी, ऋण चुकाई इत्यादि जैसी सुविधाओं के लिए जीएसटी के साथ 50 से 500 रुपये तक शुल्क वसूलते हैं. कई बैंक बकाया लोन राशि की जानकारी देने पर भी आपसे मामूली शुल्क लेते हैं.

अन्य चार्जेज

अन्य भी कई शुल्क होते हैं, जो विभिन्न कर्जदाता वसूलते हैं. ये चार्जेज लीगल या भी स्टैंप ड्यूटी चार्जेज भी हो सकते हैं.

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