MSME लोन्स लेने के दौरान कौन की समस्याएं आती हैं, जानिए

MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में बड़ा योगदान देता है. यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ-साथ लाखों लोगों को रोजगार देने में एक अहम भूमिका निभाता है. हालांकि, आगे बढ़ने के लिए पैसों का इंतजाम करना इस क्षेत्र की बड़ी चिंताओं में से एक है जो इसके आगे बढ़ने में रोड़े अटकाता है और क्षमता को दिखाने से रोकता है.

हालांकि सरकार की नीतियां और पहल क्रेडिट गैप को कम करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन एमएसएमई लोन हासिल करने में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. आज हम इस ब्लॉग के जरिए एमएसएमई लोन्स लेने के दौरान आने वाली रुकावटों के बारे में बताएंगे.

वित्तीय जागरूकता की कमी

बिजनेस में तारीफ के काबिल प्रदर्शन करने के बावजूद, कुछ व्यापारियों के पास बिजनेस के सही फैसले लेने के लिए वित्तीय जागरूकता नहीं होती. कई बार यह असंतुलित कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) अनुपात और कम क्रेडिट स्कोर की वजह बन सकती है. इसके बाद सही कर्जदाता को चुनने में नाकामी के कारण भी छोटे बिजनेस लोन पर ज्यादा ब्याज दर लगती है. इसके अलावा, इन कारोबारियों के पास लेटेस्ट तकनीक भी नहीं होती, जिसका इस्तेमाल एनबीएफसी और ऑनलाइन कर्जदाता करते हैं. इसलिए यह पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की जिम्मेदारी है कि वह बिजनेस लोन्स के बारे में MSMEs सेक्टर को वित्तीय तौर पर अवगत कराए.

समकालीन वित्तपोषण समाधान की कमी

एमएसएमई लोन्स में एक और मुश्किल अप्रचलित नियामक परंपराओं का इस्तेमाल है, जो छोटे व्यवसायों के लिए लाइसेंस, बीमा, सर्टिफिकेशन आदि हासिल करना अनिवार्य बनाता है. ये नियामक एमएसएमई सेक्टर को वक्त पर पैसे हासिल करने में रुकावट बन जाते हैं. लेकिन ऐसे कुछ छोटे बिजनेस हैं, जो ऑनलाइन बिजनेस लेनदेन का इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि उन्हें इस पर विश्वास नहीं होता और वे टेक्नोलॉजी से दूर होते हैं.

आय की कमी

बैंक आमतौर पर SME लोन देने में उत्साह नहीं दिखाते क्योंकि इनकी राशि बहुत कम होती है. इसके अलावा बैंक ये मानते हैं कि MSME में लोन वापस चुकाने की काबिलियत नहीं होती और वे उन पर सख्त नियम लगा देते हैं. चूंकि एमएसएमई कोई क्रेडिट रेटिंग नहीं दिखा पाते इसलिए उन्हें जोखिम भरे ग्राहक माना जाता है, जिससे भविष्य में उनकी बिजनेस लोन लेने की काबिलियत पर असर पड़ता है.

बोझिल भुगतान

पारंपरिक कर्जदाता बिजनेस मालिकों से यह उम्मीद करते हैं कि वे योग्यता के सख्त पैमानों पर भी खरे उतरें और कई दस्तावेज भी पेश करें. इसके अलावा, लोन की प्रोसेसिंग और लोन का वितरण भी एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है. जब MSME को SME लोन की सख्त जरूरत होती है तो यह प्रक्रिया व्यावहारिक विकल्प नहीं रह जाता. इसी की वजह से कई कारोबारी अन्य कर्ज देने वाले संस्थान जैसे एनबीएफसी का रुख कर रहे हैं, जो न सिर्फ जल्दी लोन देते हैं बल्कि उनका एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया भी राहत भरा होता है.

गारंटी की जरूरत

अक्सर लोन के लिए गारंटी की जरूरत एमएसएमई लोन्स के लिए सिरदर्द बन जाती हैं. यह समझना जरूरी है कि ऐसी कई छोटी कंपनियां हैं, जिनके पास कोई प्रॉपर्टी नहीं होती, जिसे बतौर गारंटी रखा जा सके. यही कारण है कि कुछ छोटे कारोबारी कर्जदाताओं से असुरक्षित बिजनेस लोन (पर्सनल लोन) लेते हैं, जिसके लिए कोई चीज गारंटी नहीं रखनी पड़ती. ऊपर बताए गए कारणों से अब यह साफ हो गया होगा कि SME लोन लेने में क्या चुनौतियां हैं. लेकिन इस समस्या के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. अगर आपको सही कर्जदाता मिलता है तो यह समस्या आसानी से सुलझ सकती है.

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